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Q: ‘‘रचना यदि जीवन के अर्थ का विस्तार करती है, तो आलोचना रचना के अर्थ का’’। यह कथन इनमें से किस आलोचक का है?
  • A. रामचन्द्र शुक्ल का
  • B. हजारीप्रसाद द्विवेदी का
  • C. रामस्वरूप चतुर्वेदी का
  • D. मैथ्यू आर्नल्ड का
Correct Answer: Option C - ‘‘रचना यदि जीवन के अर्थ का विस्तार करती है, तो आलोचना रचना के अर्थ का’’। यह कथन ‘रामस्वरूप चतुर्वेदी’ जी का है। आचार्य शुक्ल ने लिखा है- ‘‘समालोचना का सूत्रपात हिन्दी में एक प्रकार से भट्टजी और चौधरी साहब ने ही किया।’’ हजारी प्रसाद द्विवेदी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक चेतना सम्पन्न मानवतावादी आलोचक हैं।
C. ‘‘रचना यदि जीवन के अर्थ का विस्तार करती है, तो आलोचना रचना के अर्थ का’’। यह कथन ‘रामस्वरूप चतुर्वेदी’ जी का है। आचार्य शुक्ल ने लिखा है- ‘‘समालोचना का सूत्रपात हिन्दी में एक प्रकार से भट्टजी और चौधरी साहब ने ही किया।’’ हजारी प्रसाद द्विवेदी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक चेतना सम्पन्न मानवतावादी आलोचक हैं।

Explanations:

‘‘रचना यदि जीवन के अर्थ का विस्तार करती है, तो आलोचना रचना के अर्थ का’’। यह कथन ‘रामस्वरूप चतुर्वेदी’ जी का है। आचार्य शुक्ल ने लिखा है- ‘‘समालोचना का सूत्रपात हिन्दी में एक प्रकार से भट्टजी और चौधरी साहब ने ही किया।’’ हजारी प्रसाद द्विवेदी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक चेतना सम्पन्न मानवतावादी आलोचक हैं।