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Q: ‘लिम्पतीव तमोऽङ्गानि वर्षतीवाञ्जनं नभ:’ – इत्यत्र कोऽलङ्कार:?
  • A. रूपकम्
  • B. उत्प्रेक्षा
  • C. उपमा
  • D. यमकम्
Correct Answer: Option B - ‘लिम्पतीव तमोऽङ्गानि वर्षतीवाञ्जनं नभ:’–इत्यत्र उत्प्रेक्षा अलङ्कारोऽस्ति। अर्थात् यहाँ उत्प्रेक्षा अलज्रर है। लक्षण-सम्भावनमथोत्प्रेक्षा प्रकृतस्य समेनयत्।। (काव्यप्रकाश) किसी प्रकृत अर्थात् प्रस्तुत वस्तु (उपमेय) की अप्रस्तुत वस्तु (उपमान) के रूप में सम्भावना करना ही उत्प्रेक्षा है। अत: लिम्पतीव तमोऽङ्गानि (मानो अन्धकार अङ्गो को लेप सा रहा है।) वर्षतीवाञ्जनं नभ: (मानो आकाश से काजल (कालिमा) की वर्षा हो रही है) इसमें सम्भावना व्यक्त की गयी है, इसलिए उत्प्रेक्षा अलङ्कार है। इसी प्रकार शेष विकल्पों के लक्षण हैं– (I) रूपकम् - तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययो:। (II) उपमा - साधम्र्यमुपमा भेदे। (III) यमकम् -अर्थे सत्यर्थभिन्नानां वर्णानां सा पुन: श्रुति:।।
B. ‘लिम्पतीव तमोऽङ्गानि वर्षतीवाञ्जनं नभ:’–इत्यत्र उत्प्रेक्षा अलङ्कारोऽस्ति। अर्थात् यहाँ उत्प्रेक्षा अलज्रर है। लक्षण-सम्भावनमथोत्प्रेक्षा प्रकृतस्य समेनयत्।। (काव्यप्रकाश) किसी प्रकृत अर्थात् प्रस्तुत वस्तु (उपमेय) की अप्रस्तुत वस्तु (उपमान) के रूप में सम्भावना करना ही उत्प्रेक्षा है। अत: लिम्पतीव तमोऽङ्गानि (मानो अन्धकार अङ्गो को लेप सा रहा है।) वर्षतीवाञ्जनं नभ: (मानो आकाश से काजल (कालिमा) की वर्षा हो रही है) इसमें सम्भावना व्यक्त की गयी है, इसलिए उत्प्रेक्षा अलङ्कार है। इसी प्रकार शेष विकल्पों के लक्षण हैं– (I) रूपकम् - तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययो:। (II) उपमा - साधम्र्यमुपमा भेदे। (III) यमकम् -अर्थे सत्यर्थभिन्नानां वर्णानां सा पुन: श्रुति:।।

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‘लिम्पतीव तमोऽङ्गानि वर्षतीवाञ्जनं नभ:’–इत्यत्र उत्प्रेक्षा अलङ्कारोऽस्ति। अर्थात् यहाँ उत्प्रेक्षा अलज्रर है। लक्षण-सम्भावनमथोत्प्रेक्षा प्रकृतस्य समेनयत्।। (काव्यप्रकाश) किसी प्रकृत अर्थात् प्रस्तुत वस्तु (उपमेय) की अप्रस्तुत वस्तु (उपमान) के रूप में सम्भावना करना ही उत्प्रेक्षा है। अत: लिम्पतीव तमोऽङ्गानि (मानो अन्धकार अङ्गो को लेप सा रहा है।) वर्षतीवाञ्जनं नभ: (मानो आकाश से काजल (कालिमा) की वर्षा हो रही है) इसमें सम्भावना व्यक्त की गयी है, इसलिए उत्प्रेक्षा अलङ्कार है। इसी प्रकार शेष विकल्पों के लक्षण हैं– (I) रूपकम् - तद्रूपकमभेदो य उपमानोपमेययो:। (II) उपमा - साधम्र्यमुपमा भेदे। (III) यमकम् -अर्थे सत्यर्थभिन्नानां वर्णानां सा पुन: श्रुति:।।