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Q: लखनऊ, कढ़ाई की किस पारंपरिक कला के लिए प्रसिद्ध है?
  • A. फुलकारी
  • B. कंथा
  • C. चिकनकारी
  • D. पैचवर्क
Correct Answer: Option C - चिकनकारी लखनऊ की कढ़ाई और कशीदाकारी की प्रसिद्ध शैली है। यह लखनऊ की कशीदाकारी का उत्कृष्ट नमूना है। इसमें महीन कपड़े पर सुई-धागे से विभिन्न टाँकों द्वारा हाथ से कढ़ाई की जाती है। मुर्रे, जाली, बखिया आदि 36 प्रकार के चिकन की शैलियाँ होती हैं। फुलकारी पंजाब की कढ़ाई की शैली है जो चुनरी/दुपट्टों पर हाथ से की जाती हैं। कान्था पश्चिम बंगाल की कशीदाकारी है जिसका उपयोग बंगाल में महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली पारम्परिक ‘कान्था साडि़यों में किया जाता है।
C. चिकनकारी लखनऊ की कढ़ाई और कशीदाकारी की प्रसिद्ध शैली है। यह लखनऊ की कशीदाकारी का उत्कृष्ट नमूना है। इसमें महीन कपड़े पर सुई-धागे से विभिन्न टाँकों द्वारा हाथ से कढ़ाई की जाती है। मुर्रे, जाली, बखिया आदि 36 प्रकार के चिकन की शैलियाँ होती हैं। फुलकारी पंजाब की कढ़ाई की शैली है जो चुनरी/दुपट्टों पर हाथ से की जाती हैं। कान्था पश्चिम बंगाल की कशीदाकारी है जिसका उपयोग बंगाल में महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली पारम्परिक ‘कान्था साडि़यों में किया जाता है।

Explanations:

चिकनकारी लखनऊ की कढ़ाई और कशीदाकारी की प्रसिद्ध शैली है। यह लखनऊ की कशीदाकारी का उत्कृष्ट नमूना है। इसमें महीन कपड़े पर सुई-धागे से विभिन्न टाँकों द्वारा हाथ से कढ़ाई की जाती है। मुर्रे, जाली, बखिया आदि 36 प्रकार के चिकन की शैलियाँ होती हैं। फुलकारी पंजाब की कढ़ाई की शैली है जो चुनरी/दुपट्टों पर हाथ से की जाती हैं। कान्था पश्चिम बंगाल की कशीदाकारी है जिसका उपयोग बंगाल में महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली पारम्परिक ‘कान्था साडि़यों में किया जाता है।