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Q: ‘लक्ष्मीपुरा’ इनमें से किस विधा की रचना है?
  • A. रिपोर्ताज
  • B. संस्मरण
  • C. व्यंग्य
  • D. रेखाचित्र
Correct Answer: Option A - किसी लेखक द्वारा किसी भी आयोजन, घटना, संस्था आदि का कलात्मक ढंग से विवरण रिपोर्ट तैयार करके प्रस्तुतीकरण करना, रिपोर्ताज कहलाता है।’’ ‘लक्ष्मीपुरा’ रिपोर्ताज विधा की रचना है। ‘रिपोर्ताज’ फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। गद्य विधा के रूप में इसका आविर्भाव द्वितीय विश्वयुद्ध के आस-पास हुआ। रिपोर्ताज जनक के रूप में रूसी साहित्यकार इलिया एहरेनवर्ग को स्वीकार किया जाता है। हिन्दी में रिपोर्ताज का जनक शिवदान सिंह चौहान को माना जाता है। ‘रुपाभ’ पत्रिका के दिसम्बर, 1938 ई० में प्रकाशित ‘लक्ष्मीपुरा’ को हिन्दी का प्रथम रिपोर्ताज माना जाता है। शिवदान सिंह चौहान के रिपोर्ताज हैं- लक्ष्मीपुरा, मौत के खिलाफ जिंदगी की लड़ाई। संस्मरण : स्मृति के आधार पर किसी विषय या व्यक्ति के संबंध में लिखित ग्रन्थ या लेख ‘संस्मरण’ कहलाता है। बालमुकुंद गुप्त का 1907 में ‘प्रताप नारायण मिश्र पर लिखा संस्मरण हिंदी का प्रथम संस्मरण माना जाता है।
A. किसी लेखक द्वारा किसी भी आयोजन, घटना, संस्था आदि का कलात्मक ढंग से विवरण रिपोर्ट तैयार करके प्रस्तुतीकरण करना, रिपोर्ताज कहलाता है।’’ ‘लक्ष्मीपुरा’ रिपोर्ताज विधा की रचना है। ‘रिपोर्ताज’ फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। गद्य विधा के रूप में इसका आविर्भाव द्वितीय विश्वयुद्ध के आस-पास हुआ। रिपोर्ताज जनक के रूप में रूसी साहित्यकार इलिया एहरेनवर्ग को स्वीकार किया जाता है। हिन्दी में रिपोर्ताज का जनक शिवदान सिंह चौहान को माना जाता है। ‘रुपाभ’ पत्रिका के दिसम्बर, 1938 ई० में प्रकाशित ‘लक्ष्मीपुरा’ को हिन्दी का प्रथम रिपोर्ताज माना जाता है। शिवदान सिंह चौहान के रिपोर्ताज हैं- लक्ष्मीपुरा, मौत के खिलाफ जिंदगी की लड़ाई। संस्मरण : स्मृति के आधार पर किसी विषय या व्यक्ति के संबंध में लिखित ग्रन्थ या लेख ‘संस्मरण’ कहलाता है। बालमुकुंद गुप्त का 1907 में ‘प्रताप नारायण मिश्र पर लिखा संस्मरण हिंदी का प्रथम संस्मरण माना जाता है।

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किसी लेखक द्वारा किसी भी आयोजन, घटना, संस्था आदि का कलात्मक ढंग से विवरण रिपोर्ट तैयार करके प्रस्तुतीकरण करना, रिपोर्ताज कहलाता है।’’ ‘लक्ष्मीपुरा’ रिपोर्ताज विधा की रचना है। ‘रिपोर्ताज’ फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। गद्य विधा के रूप में इसका आविर्भाव द्वितीय विश्वयुद्ध के आस-पास हुआ। रिपोर्ताज जनक के रूप में रूसी साहित्यकार इलिया एहरेनवर्ग को स्वीकार किया जाता है। हिन्दी में रिपोर्ताज का जनक शिवदान सिंह चौहान को माना जाता है। ‘रुपाभ’ पत्रिका के दिसम्बर, 1938 ई० में प्रकाशित ‘लक्ष्मीपुरा’ को हिन्दी का प्रथम रिपोर्ताज माना जाता है। शिवदान सिंह चौहान के रिपोर्ताज हैं- लक्ष्मीपुरा, मौत के खिलाफ जिंदगी की लड़ाई। संस्मरण : स्मृति के आधार पर किसी विषय या व्यक्ति के संबंध में लिखित ग्रन्थ या लेख ‘संस्मरण’ कहलाता है। बालमुकुंद गुप्त का 1907 में ‘प्रताप नारायण मिश्र पर लिखा संस्मरण हिंदी का प्रथम संस्मरण माना जाता है।