Correct Answer:
Option D - चार्वाक भारतीय दर्शन के नास्तिक सम्प्रदाय का अनीश्वरवादी, प्रत्यक्षवादी, भौतिकवादी तथा सुखवादी दर्शन है। इसे लोकायत दर्शन भी कहते हैं। चार्वाक-दर्शन आत्मा के अस्तित्व तथा मोक्ष में विश्वास न करते हुए, केवल भौतिक पदार्थ रूपी शरीर को ही परमसत्ता मानता है। चार्वाक के अनुसार `काम' अर्थात् इच्छाओं की तृप्ति ही मानव जीवन का चरम लक्ष्य है। मनुष्य के सारे कार्य सुख की प्राप्ति के लिए ही होते हैं। चार्वाक के अनुसार – ``यावज्जवेत् सुखं जीवेत् ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत्। भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमन: कुत:।'' अर्थात् जब तक जिएं सुख से जिएं, सुख के लिए ऋण लेकर भी घी पी लेना चाहिए क्योंकि शरीर भस्मीभूत (नष्ट) हो जाने के पश्चात् पुनर्जन्म नहीं हो सकता है।
D. चार्वाक भारतीय दर्शन के नास्तिक सम्प्रदाय का अनीश्वरवादी, प्रत्यक्षवादी, भौतिकवादी तथा सुखवादी दर्शन है। इसे लोकायत दर्शन भी कहते हैं। चार्वाक-दर्शन आत्मा के अस्तित्व तथा मोक्ष में विश्वास न करते हुए, केवल भौतिक पदार्थ रूपी शरीर को ही परमसत्ता मानता है। चार्वाक के अनुसार `काम' अर्थात् इच्छाओं की तृप्ति ही मानव जीवन का चरम लक्ष्य है। मनुष्य के सारे कार्य सुख की प्राप्ति के लिए ही होते हैं। चार्वाक के अनुसार – ``यावज्जवेत् सुखं जीवेत् ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत्। भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमन: कुत:।'' अर्थात् जब तक जिएं सुख से जिएं, सुख के लिए ऋण लेकर भी घी पी लेना चाहिए क्योंकि शरीर भस्मीभूत (नष्ट) हो जाने के पश्चात् पुनर्जन्म नहीं हो सकता है।