Correct Answer:
Option D - लघु सिद्धान्त कौमुदी वरदराज द्वारा रचित है। सम्प्रति ग्रन्थ में व्याकरण के सूत्रों की विवेचना की गयी है। वरदराज भट्टोजि दीक्षित के शिष्य थे। इनके द्वारा चार ग्रन्थ मिलते हैं–लघुसिद्धान्तकौमुदी, मध्यसिद्धान्तकौमुदी, गीर्वाणपदमञ्जरी और सारसिद्धान्तकौमुदी। ‘लघुसिद्धान्तकौमुदी’ का निर्माण संस्कृत व्याकरण के प्र्राम्भिक अध्येताओं के लिए हुआ है, अत: इसमें जटिल एवं अनावश्यक सूत्रों को स्थान नहीं दिया गया है।
D. लघु सिद्धान्त कौमुदी वरदराज द्वारा रचित है। सम्प्रति ग्रन्थ में व्याकरण के सूत्रों की विवेचना की गयी है। वरदराज भट्टोजि दीक्षित के शिष्य थे। इनके द्वारा चार ग्रन्थ मिलते हैं–लघुसिद्धान्तकौमुदी, मध्यसिद्धान्तकौमुदी, गीर्वाणपदमञ्जरी और सारसिद्धान्तकौमुदी। ‘लघुसिद्धान्तकौमुदी’ का निर्माण संस्कृत व्याकरण के प्र्राम्भिक अध्येताओं के लिए हुआ है, अत: इसमें जटिल एवं अनावश्यक सूत्रों को स्थान नहीं दिया गया है।