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Q: Laterite soil is found in : लेटेराइट मिट्टी पायी जाती है–
  • A. Uttar Pradesh/उत्तर प्रदेश में
  • B. Himachal Pradesh/हिमाचल प्रदेश में
  • C. Punjab/पंजाब में
  • D. Maharashtra/महाराष्ट्र में
Correct Answer: Option D - लैटेराइट मृदा देश के लगभग 1.26 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र पर विस्तृत है। इस मृदा का सर्वाधिक विस्तार केरल, महाराष्ट्र एवं असोम में पाया जाता है। ये उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र की मृदायें हैं, जहाँ मौसमी वर्षा होती है। यह बहुत ही अपक्षालित मृदा है। इसका लाल रंग लोहे के ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है। सामान्यत: ये मृदा लोहा तथा एल्युमीनियम से समृद्ध होती है, पर नाइट्रोजन, पोटाश, चूना तथा जीवाश्म की कमी होती हैं। उर्वरकों का प्रयोग कर इनमें चाय, कहवा, रबड़, सिनकोना तथा काजू की कृषि की जाती है।
D. लैटेराइट मृदा देश के लगभग 1.26 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र पर विस्तृत है। इस मृदा का सर्वाधिक विस्तार केरल, महाराष्ट्र एवं असोम में पाया जाता है। ये उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र की मृदायें हैं, जहाँ मौसमी वर्षा होती है। यह बहुत ही अपक्षालित मृदा है। इसका लाल रंग लोहे के ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है। सामान्यत: ये मृदा लोहा तथा एल्युमीनियम से समृद्ध होती है, पर नाइट्रोजन, पोटाश, चूना तथा जीवाश्म की कमी होती हैं। उर्वरकों का प्रयोग कर इनमें चाय, कहवा, रबड़, सिनकोना तथा काजू की कृषि की जाती है।

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लैटेराइट मृदा देश के लगभग 1.26 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र पर विस्तृत है। इस मृदा का सर्वाधिक विस्तार केरल, महाराष्ट्र एवं असोम में पाया जाता है। ये उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र की मृदायें हैं, जहाँ मौसमी वर्षा होती है। यह बहुत ही अपक्षालित मृदा है। इसका लाल रंग लोहे के ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है। सामान्यत: ये मृदा लोहा तथा एल्युमीनियम से समृद्ध होती है, पर नाइट्रोजन, पोटाश, चूना तथा जीवाश्म की कमी होती हैं। उर्वरकों का प्रयोग कर इनमें चाय, कहवा, रबड़, सिनकोना तथा काजू की कृषि की जाती है।