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Q: ‘काव्यशोभाकरान् धर्मानलङ्कारान प्रचक्षते’ अलंकार की यह परिभाषा किसकी है?
  • A. आचार्य दण्डी
  • B. आचार्य वामन
  • C. आचार्य कुंतक
  • D. आचार्य मम्मट
Correct Answer: Option A - व्याख्या- ‘काव्यशोभाकरान् धर्मानलङ्कारान प्रचक्षते’ अलंकार की यह परिभाषा आचार्य दण्डी की है। आचार्य दण्डी ने काव्य के शोभाकारक धर्म को अलंकार कहा है। आचार्य दण्डी ने 39 प्रकार के अलंकार का वर्णन किया है जिसमें 4 शब्दालंकार के (अनुप्रास,यमक, चित्र प्रहेलिका) तथा 35 अर्थालंकार के हैं।
A. व्याख्या- ‘काव्यशोभाकरान् धर्मानलङ्कारान प्रचक्षते’ अलंकार की यह परिभाषा आचार्य दण्डी की है। आचार्य दण्डी ने काव्य के शोभाकारक धर्म को अलंकार कहा है। आचार्य दण्डी ने 39 प्रकार के अलंकार का वर्णन किया है जिसमें 4 शब्दालंकार के (अनुप्रास,यमक, चित्र प्रहेलिका) तथा 35 अर्थालंकार के हैं।

Explanations:

व्याख्या- ‘काव्यशोभाकरान् धर्मानलङ्कारान प्रचक्षते’ अलंकार की यह परिभाषा आचार्य दण्डी की है। आचार्य दण्डी ने काव्य के शोभाकारक धर्म को अलंकार कहा है। आचार्य दण्डी ने 39 प्रकार के अलंकार का वर्णन किया है जिसमें 4 शब्दालंकार के (अनुप्रास,यमक, चित्र प्रहेलिका) तथा 35 अर्थालंकार के हैं।