Correct Answer:
Option B - भारतीय काव्य-शास्त्र के काव्य-सम्प्रदायों का विकास क्रम इस प्रकार है– रस सम्प्रदाय, अलंकार सम्प्रदाय, रीति सम्प्रदाय, वक्रोक्ति सम्प्रदाय, ध्वनि सम्प्रदाय, औचित्य सम्प्रदाय। इन सम्प्रदायों के प्रवर्तक निम्नलिखित हैं –
सम्प्रदाय प्रवर्तक
रस आचार्य भरतमुनि
अलंकार आचार्य भामह
रीति आचार्य वामन
वक्रोक्ति आचार्य कुन्तक
ध्वनि आनन्दवर्धन
औचित्य आचार्य क्षेमेन्द्र
B. भारतीय काव्य-शास्त्र के काव्य-सम्प्रदायों का विकास क्रम इस प्रकार है– रस सम्प्रदाय, अलंकार सम्प्रदाय, रीति सम्प्रदाय, वक्रोक्ति सम्प्रदाय, ध्वनि सम्प्रदाय, औचित्य सम्प्रदाय। इन सम्प्रदायों के प्रवर्तक निम्नलिखित हैं –
सम्प्रदाय प्रवर्तक
रस आचार्य भरतमुनि
अलंकार आचार्य भामह
रीति आचार्य वामन
वक्रोक्ति आचार्य कुन्तक
ध्वनि आनन्दवर्धन
औचित्य आचार्य क्षेमेन्द्र