search
Q: ‘कवित्त रत्नाकर’ के रचयिता हैं?
  • A. जगन्नाथदास रत्नाकर
  • B. सेनापति
  • C. मतिराम
  • D. बोधा
Correct Answer: Option B - ‘कवित्त रत्नाकर’ रीतिकालीन कवि सेनापति की रचना है। सेनापति प्रकृति वर्णन के लिए विशेषरूप से प्रसिद्ध हैं। ‘काव्यकल्पद्रुम’ इनकी अन्य रचना है। ‘कवित्त रत्नाकर’ के पाँच तरंग और 394 छन्द में रामकथा का वर्णन है। सेनापति ब्रजभाषा के कवि हैं और इनका सर्वाधिक प्रिय अलंकार श्लेष है। बोधा की प्रमुख रचनाएँ हैं- विरह वारीश, इश्कनामा। मतिराम की प्रमुख रचनाएँ हैं- पूâल मंजरी, लक्षण शृंगार, साहित्य सार, रसराज, ललित ललाम, सतसई, अलंकार पंचाशिका, वृत्त कौमुदी। जगन्नाथ दास रत्नाकर आधुनिक युग के ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि हैं, इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- हरिश्चन्द्र, गंगावतरण, उद्धवशतक, हिंडोला, कलकाशी, समालोचनादर्श, शृंगार लहरी, गंगालहरी, विष्णु लहरी, रत्नाष्टक, वीराष्टक, प्रकीर्णक पद्मावली।
B. ‘कवित्त रत्नाकर’ रीतिकालीन कवि सेनापति की रचना है। सेनापति प्रकृति वर्णन के लिए विशेषरूप से प्रसिद्ध हैं। ‘काव्यकल्पद्रुम’ इनकी अन्य रचना है। ‘कवित्त रत्नाकर’ के पाँच तरंग और 394 छन्द में रामकथा का वर्णन है। सेनापति ब्रजभाषा के कवि हैं और इनका सर्वाधिक प्रिय अलंकार श्लेष है। बोधा की प्रमुख रचनाएँ हैं- विरह वारीश, इश्कनामा। मतिराम की प्रमुख रचनाएँ हैं- पूâल मंजरी, लक्षण शृंगार, साहित्य सार, रसराज, ललित ललाम, सतसई, अलंकार पंचाशिका, वृत्त कौमुदी। जगन्नाथ दास रत्नाकर आधुनिक युग के ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि हैं, इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- हरिश्चन्द्र, गंगावतरण, उद्धवशतक, हिंडोला, कलकाशी, समालोचनादर्श, शृंगार लहरी, गंगालहरी, विष्णु लहरी, रत्नाष्टक, वीराष्टक, प्रकीर्णक पद्मावली।

Explanations:

‘कवित्त रत्नाकर’ रीतिकालीन कवि सेनापति की रचना है। सेनापति प्रकृति वर्णन के लिए विशेषरूप से प्रसिद्ध हैं। ‘काव्यकल्पद्रुम’ इनकी अन्य रचना है। ‘कवित्त रत्नाकर’ के पाँच तरंग और 394 छन्द में रामकथा का वर्णन है। सेनापति ब्रजभाषा के कवि हैं और इनका सर्वाधिक प्रिय अलंकार श्लेष है। बोधा की प्रमुख रचनाएँ हैं- विरह वारीश, इश्कनामा। मतिराम की प्रमुख रचनाएँ हैं- पूâल मंजरी, लक्षण शृंगार, साहित्य सार, रसराज, ललित ललाम, सतसई, अलंकार पंचाशिका, वृत्त कौमुदी। जगन्नाथ दास रत्नाकर आधुनिक युग के ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि हैं, इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- हरिश्चन्द्र, गंगावतरण, उद्धवशतक, हिंडोला, कलकाशी, समालोचनादर्श, शृंगार लहरी, गंगालहरी, विष्णु लहरी, रत्नाष्टक, वीराष्टक, प्रकीर्णक पद्मावली।