Explanations:
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में 15 अधिकरण तथा 180 प्रकरण है। इस ग्रन्थ में इसके श्लोकों की संख्या 4,000 बताई गयी है। अर्थशास्त्र में राजा के कर्तव्यों को निर्दिष्ट करता है। यह वित्तीय सुधारों की आवश्यकता पर बल देता है, तथा राजनीति के सिद्धान्त स्थापित करता है। अर्थशास्त्र में केन्द्रीय प्रशासन का विस्तृत विवरण प्राप्त होता है। अर्थशास्त्र में ही प्रत्येक विभाग को तीर्थ कहा जाता था। अर्थशास्त्र में विभागीय अध्यक्षों तथा उनके कार्यों की एक लम्बी सूची मिलती है- खानों के अध्यक्ष को ‘आकाराध्यक्ष’ राजा की ओर से सिक्के ढलवाने वाले अधिकारी को लक्षणाध्यक्ष कहा जाता है।