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Q: कथन (A): मानव शरीर में यकृत वसा के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कारण (R): यकृत दो महत्वपूर्ण वसा-पाचक एंजाइम उत्पन्न करता है। कूट :
  • A. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है
  • B. A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है
  • C. A सही है, परन्तु R गलत है
  • D. A गलत है, परन्तु R सही है
Correct Answer: Option C - यकृत मानव-शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो उदर-गुहा (Abdominal Cavity) के ऊपरी भाग में दाहिनी ओर स्थित होता है। इसका वजन लगभग 1.5-2 कि.ग्रा. होता है। यह एक गहरे गर्त द्वारा दो खण्डों में बटा रहता है। इसके निचले भाग में नाशपाती के आकार की एक छोटी सी थैली होती है जिसे पित्ताशय कहा जाता है। यकृत द्वारा स्रावित पित्त इस थैली में संचित होता है। यह पित्त आंत में उपस्थित एन्जाइमों की क्रिया को तीव्र कर देता है। इसके अतिरिक्त यकृत, कार्बोहाइड्रेट, वसा (fat) और प्रोटीन उपापचय (Metabolism) में सक्रिय रूप से भाग लेता है तथा शरीर में उत्पन्न जीवविषों (Toxins) को प्रभावहीन कर इसकी रक्षा करता है।
C. यकृत मानव-शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो उदर-गुहा (Abdominal Cavity) के ऊपरी भाग में दाहिनी ओर स्थित होता है। इसका वजन लगभग 1.5-2 कि.ग्रा. होता है। यह एक गहरे गर्त द्वारा दो खण्डों में बटा रहता है। इसके निचले भाग में नाशपाती के आकार की एक छोटी सी थैली होती है जिसे पित्ताशय कहा जाता है। यकृत द्वारा स्रावित पित्त इस थैली में संचित होता है। यह पित्त आंत में उपस्थित एन्जाइमों की क्रिया को तीव्र कर देता है। इसके अतिरिक्त यकृत, कार्बोहाइड्रेट, वसा (fat) और प्रोटीन उपापचय (Metabolism) में सक्रिय रूप से भाग लेता है तथा शरीर में उत्पन्न जीवविषों (Toxins) को प्रभावहीन कर इसकी रक्षा करता है।

Explanations:

यकृत मानव-शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो उदर-गुहा (Abdominal Cavity) के ऊपरी भाग में दाहिनी ओर स्थित होता है। इसका वजन लगभग 1.5-2 कि.ग्रा. होता है। यह एक गहरे गर्त द्वारा दो खण्डों में बटा रहता है। इसके निचले भाग में नाशपाती के आकार की एक छोटी सी थैली होती है जिसे पित्ताशय कहा जाता है। यकृत द्वारा स्रावित पित्त इस थैली में संचित होता है। यह पित्त आंत में उपस्थित एन्जाइमों की क्रिया को तीव्र कर देता है। इसके अतिरिक्त यकृत, कार्बोहाइड्रेट, वसा (fat) और प्रोटीन उपापचय (Metabolism) में सक्रिय रूप से भाग लेता है तथा शरीर में उत्पन्न जीवविषों (Toxins) को प्रभावहीन कर इसकी रक्षा करता है।