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Q: ‘कृतवान्’ इति पदे कृ धातो: प्रत्यय: स्यात् –
  • A. वतुप्
  • B. क्तवतु।
  • C. क्त।
  • D. शानच्।
Correct Answer: Option B - ‘कृतवान्’ इति पदे कृ धातो: प्रत्यय ‘क्तवतु’ स्यात् । क्त तथा क्तवतु प्रत्यय को निष्ठा कहते हैं। निष्ठा शब्द का यौगिक अर्थ है समाप्ति’। क्त और क्तवतु किसी कार्य की समाप्ति का बोध कराते हैं, जैसे-स: अपराधं कृतवान् । उसने अपराध कर डाला। क्त का (त) तथा क्तवतु का (तवत्) शेष रह जाता है। जैसे – पठ् + क्त = पठित:। पठ + क्तवतु = पठितवान् ।
B. ‘कृतवान्’ इति पदे कृ धातो: प्रत्यय ‘क्तवतु’ स्यात् । क्त तथा क्तवतु प्रत्यय को निष्ठा कहते हैं। निष्ठा शब्द का यौगिक अर्थ है समाप्ति’। क्त और क्तवतु किसी कार्य की समाप्ति का बोध कराते हैं, जैसे-स: अपराधं कृतवान् । उसने अपराध कर डाला। क्त का (त) तथा क्तवतु का (तवत्) शेष रह जाता है। जैसे – पठ् + क्त = पठित:। पठ + क्तवतु = पठितवान् ।

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‘कृतवान्’ इति पदे कृ धातो: प्रत्यय ‘क्तवतु’ स्यात् । क्त तथा क्तवतु प्रत्यय को निष्ठा कहते हैं। निष्ठा शब्द का यौगिक अर्थ है समाप्ति’। क्त और क्तवतु किसी कार्य की समाप्ति का बोध कराते हैं, जैसे-स: अपराधं कृतवान् । उसने अपराध कर डाला। क्त का (त) तथा क्तवतु का (तवत्) शेष रह जाता है। जैसे – पठ् + क्त = पठित:। पठ + क्तवतु = पठितवान् ।