Correct Answer:
Option D - ‘केशव कहि न जाय का कहिये’।
देखत तब रचना विचित्र अति समुझि मनहिं मन रहिये।’ उक्त पंक्ति में ‘अद्भुत रस’ है। इसका स्थायी भाव ‘विस्मय’ होता है। जब व्यक्ति के मन में विचित्र अथवा आश्चर्यजनक वस्तुओं को देखकर जो विस्मय आदि के भाव उत्पन्न होता हो वहाँ अद्भुत रस होता है।
D. ‘केशव कहि न जाय का कहिये’।
देखत तब रचना विचित्र अति समुझि मनहिं मन रहिये।’ उक्त पंक्ति में ‘अद्भुत रस’ है। इसका स्थायी भाव ‘विस्मय’ होता है। जब व्यक्ति के मन में विचित्र अथवा आश्चर्यजनक वस्तुओं को देखकर जो विस्मय आदि के भाव उत्पन्न होता हो वहाँ अद्भुत रस होता है।