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Q: ``कस्यात्यन्तं सुखमुपनतं दु:खमेकान्ततो वा; नौचैर्गच्छत्युपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण।'' इस श्लोक का संदेश है –
  • A. संसार परिवर्तनशील है
  • B. दु:ख में स्थिर रहना चाहिए
  • C. सुख-दु:ख परिवर्तनशील है
  • D. नीच का साथ नहीं करना चाहिए
Correct Answer: Option C - `कस्यात्यन्तं सुखमुपनतं दु:खमेकान्ततो वा, नीचैर्गच्छत्युपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण।' अर्थात् किसी को अत्यन्त सुख प्राप्त होता तो किसी को अत्यन्त दु:ख किन्तु जो नीचा है वह ऊपर हो जाता है अर्थात् जो दु:खी है उसे सुख की प्राप्ति हो जाती है। यह समय चक्र की दशा है अर्थात् सुख दु:ख परिवर्तनशील हैं।
C. `कस्यात्यन्तं सुखमुपनतं दु:खमेकान्ततो वा, नीचैर्गच्छत्युपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण।' अर्थात् किसी को अत्यन्त सुख प्राप्त होता तो किसी को अत्यन्त दु:ख किन्तु जो नीचा है वह ऊपर हो जाता है अर्थात् जो दु:खी है उसे सुख की प्राप्ति हो जाती है। यह समय चक्र की दशा है अर्थात् सुख दु:ख परिवर्तनशील हैं।

Explanations:

`कस्यात्यन्तं सुखमुपनतं दु:खमेकान्ततो वा, नीचैर्गच्छत्युपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण।' अर्थात् किसी को अत्यन्त सुख प्राप्त होता तो किसी को अत्यन्त दु:ख किन्तु जो नीचा है वह ऊपर हो जाता है अर्थात् जो दु:खी है उसे सुख की प्राप्ति हो जाती है। यह समय चक्र की दशा है अर्थात् सुख दु:ख परिवर्तनशील हैं।