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Q: यथाशक्ति में समास है-
  • A. अव्ययीभाव
  • B. तत्पुरुष
  • C. द्विगु
  • D. कर्मधारय
Correct Answer: Option A - यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार (अव्ययीभाव) इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। पूरा शब्द क्रिया विशेषण के अर्थ में व्यवहृत होता है। तत्पुरुष समास - जिस समास का उत्तर पद अर्थात अन्तिमपद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। गगन चुम्बी - गगन को चूमने वाला कर्मधारय समास - कर्मधारय का पूर्व पद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। अर्थात विशेषण + विशेष्य (संज्ञा) = कर्मधारय महाकवि = महान है जो कवि द्विगु समास - जिस कर्मधारय का पूर्वपद संख्याबोधक हो वह द्विगु कर्मधारय समास कहलाता है। जैसे- चौराहा, अष्टाध्यायी, त्रिभुवन
A. यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार (अव्ययीभाव) इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। पूरा शब्द क्रिया विशेषण के अर्थ में व्यवहृत होता है। तत्पुरुष समास - जिस समास का उत्तर पद अर्थात अन्तिमपद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। गगन चुम्बी - गगन को चूमने वाला कर्मधारय समास - कर्मधारय का पूर्व पद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। अर्थात विशेषण + विशेष्य (संज्ञा) = कर्मधारय महाकवि = महान है जो कवि द्विगु समास - जिस कर्मधारय का पूर्वपद संख्याबोधक हो वह द्विगु कर्मधारय समास कहलाता है। जैसे- चौराहा, अष्टाध्यायी, त्रिभुवन

Explanations:

यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार (अव्ययीभाव) इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। पूरा शब्द क्रिया विशेषण के अर्थ में व्यवहृत होता है। तत्पुरुष समास - जिस समास का उत्तर पद अर्थात अन्तिमपद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। गगन चुम्बी - गगन को चूमने वाला कर्मधारय समास - कर्मधारय का पूर्व पद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। अर्थात विशेषण + विशेष्य (संज्ञा) = कर्मधारय महाकवि = महान है जो कवि द्विगु समास - जिस कर्मधारय का पूर्वपद संख्याबोधक हो वह द्विगु कर्मधारय समास कहलाता है। जैसे- चौराहा, अष्टाध्यायी, त्रिभुवन