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Q: किरातार्जुनीयस्य प्रथम सर्गस्य अन्तिम पद्यं केन छन्दसा निबद्धोऽस्ति?
  • A. वंशस्थ-छन्दसा
  • B. उपजाति-छन्दसा
  • C. आर्या-छन्दसा
  • D. मालिनी-छन्दसा
Correct Answer: Option D - किरातार्जुनीयस्य प्रथम सर्गस्य अन्तिम पद्यं मालिनी छन्दसा निबद्धोऽस्ति। मालिनी छन्द - ‘ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकै:।’ मालिनी छन्द के प्रत्येक पाद में 15 वर्ण होते हैं। क्रमश: 2 नगण, 1 मगण, 2 यगण। इसमें 8 एवं 7 पर यति होती है। इसमे कुल 15 वर्ण होते हैं।
D. किरातार्जुनीयस्य प्रथम सर्गस्य अन्तिम पद्यं मालिनी छन्दसा निबद्धोऽस्ति। मालिनी छन्द - ‘ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकै:।’ मालिनी छन्द के प्रत्येक पाद में 15 वर्ण होते हैं। क्रमश: 2 नगण, 1 मगण, 2 यगण। इसमें 8 एवं 7 पर यति होती है। इसमे कुल 15 वर्ण होते हैं।

Explanations:

किरातार्जुनीयस्य प्रथम सर्गस्य अन्तिम पद्यं मालिनी छन्दसा निबद्धोऽस्ति। मालिनी छन्द - ‘ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकै:।’ मालिनी छन्द के प्रत्येक पाद में 15 वर्ण होते हैं। क्रमश: 2 नगण, 1 मगण, 2 यगण। इसमें 8 एवं 7 पर यति होती है। इसमे कुल 15 वर्ण होते हैं।