Correct Answer:
Option A - किरातार्जुनीयस्य कथावस्तुन: मूलस्रोत: महाभारतम्। किरातार्जुनीयम् की कथावस्तु का मूलस्रोत महाभारत का ‘वनपर्व’ है। यह भारवि की एकमात्र रचना है जो अट्ठारह सर्गों में विभक्त है। इसका मुख्य रस ‘वीर’ तथा गौण रस ‘शृंगार’ है। इसके प्रथम तीन सर्गों’ को ‘पाषाणत्रय’ कहा जाता है। इसकी गणना बृहत्त्रयी के अन्तर्गत की जाती है।
A. किरातार्जुनीयस्य कथावस्तुन: मूलस्रोत: महाभारतम्। किरातार्जुनीयम् की कथावस्तु का मूलस्रोत महाभारत का ‘वनपर्व’ है। यह भारवि की एकमात्र रचना है जो अट्ठारह सर्गों में विभक्त है। इसका मुख्य रस ‘वीर’ तथा गौण रस ‘शृंगार’ है। इसके प्रथम तीन सर्गों’ को ‘पाषाणत्रय’ कहा जाता है। इसकी गणना बृहत्त्रयी के अन्तर्गत की जाती है।