Correct Answer:
Option C - किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का छन्द वंशस्थ है। इस महाकाव्य के प्रथम सर्ग के अन्तिम दो श्लोक क्रमश: पुष्पिताग्रा एवं मालिनी छन्द में है। वसन्ततिलका का लक्षण है– ‘‘उक्तावसन्ततिलका तभजा जगौ ग:’’। इसी प्रकार वंशस्थ का लक्षण इस प्रकार है –‘‘जतौतुवंशस्थमुदीरितम् जरौ’’। उपजाति छन्द का लक्षण इस प्रकार है–
‘‘अनन्तरोदिरितिलक्ष्मभाजौपादौयदीयावुपजातयस्ता:’’।
C. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का छन्द वंशस्थ है। इस महाकाव्य के प्रथम सर्ग के अन्तिम दो श्लोक क्रमश: पुष्पिताग्रा एवं मालिनी छन्द में है। वसन्ततिलका का लक्षण है– ‘‘उक्तावसन्ततिलका तभजा जगौ ग:’’। इसी प्रकार वंशस्थ का लक्षण इस प्रकार है –‘‘जतौतुवंशस्थमुदीरितम् जरौ’’। उपजाति छन्द का लक्षण इस प्रकार है–
‘‘अनन्तरोदिरितिलक्ष्मभाजौपादौयदीयावुपजातयस्ता:’’।