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Q: ‘किरातार्जुनीयम्’ के प्रथम सर्ग का छन्द है :
  • A. वसन्ततिलका
  • B. उपेन्द्रवङ्का
  • C. वंशस्थ
  • D. उपजाति
Correct Answer: Option C - किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का छन्द वंशस्थ है। इस महाकाव्य के प्रथम सर्ग के अन्तिम दो श्लोक क्रमश: पुष्पिताग्रा एवं मालिनी छन्द में है। वसन्ततिलका का लक्षण है– ‘‘उक्तावसन्ततिलका तभजा जगौ ग:’’। इसी प्रकार वंशस्थ का लक्षण इस प्रकार है –‘‘जतौतुवंशस्थमुदीरितम् जरौ’’। उपजाति छन्द का लक्षण इस प्रकार है– ‘‘अनन्तरोदिरितिलक्ष्मभाजौपादौयदीयावुपजातयस्ता:’’।
C. किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का छन्द वंशस्थ है। इस महाकाव्य के प्रथम सर्ग के अन्तिम दो श्लोक क्रमश: पुष्पिताग्रा एवं मालिनी छन्द में है। वसन्ततिलका का लक्षण है– ‘‘उक्तावसन्ततिलका तभजा जगौ ग:’’। इसी प्रकार वंशस्थ का लक्षण इस प्रकार है –‘‘जतौतुवंशस्थमुदीरितम् जरौ’’। उपजाति छन्द का लक्षण इस प्रकार है– ‘‘अनन्तरोदिरितिलक्ष्मभाजौपादौयदीयावुपजातयस्ता:’’।

Explanations:

किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का छन्द वंशस्थ है। इस महाकाव्य के प्रथम सर्ग के अन्तिम दो श्लोक क्रमश: पुष्पिताग्रा एवं मालिनी छन्द में है। वसन्ततिलका का लक्षण है– ‘‘उक्तावसन्ततिलका तभजा जगौ ग:’’। इसी प्रकार वंशस्थ का लक्षण इस प्रकार है –‘‘जतौतुवंशस्थमुदीरितम् जरौ’’। उपजाति छन्द का लक्षण इस प्रकार है– ‘‘अनन्तरोदिरितिलक्ष्मभाजौपादौयदीयावुपजातयस्ता:’’।