search
Q: जब भारत की न्यायिक पद्धति में लोक हित वाद (PIL) लाया गया तब भारत के मुख्य न्यायमूर्ति कौन थे?
  • A. एम. हिदायतुल्लाह
  • B. ए. एस. आंनन्द
  • C. पी. एन. भगवती
  • D. ए. एम. अहमदी
Correct Answer: Option C - लोक हितवाद (PIL) के प्रवर्तक न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर रहे है। लोकहितवाद का अर्थ है ‘कोई भी जनभावना वाला व्यक्ति या सामाजिक संगठन किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के अधिकार दिलाने के लिए न्यायालय जा सकता है, अगर ये व्यक्ति/समूह निर्धनता, अज्ञानता अथवा अपनी सामाजिक-आर्थिक रूप से प्रतिकूल दशाओं के कारण न्यायालय उपचार के लिए नही जा सकते।’’
C. लोक हितवाद (PIL) के प्रवर्तक न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर रहे है। लोकहितवाद का अर्थ है ‘कोई भी जनभावना वाला व्यक्ति या सामाजिक संगठन किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के अधिकार दिलाने के लिए न्यायालय जा सकता है, अगर ये व्यक्ति/समूह निर्धनता, अज्ञानता अथवा अपनी सामाजिक-आर्थिक रूप से प्रतिकूल दशाओं के कारण न्यायालय उपचार के लिए नही जा सकते।’’

Explanations:

लोक हितवाद (PIL) के प्रवर्तक न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर रहे है। लोकहितवाद का अर्थ है ‘कोई भी जनभावना वाला व्यक्ति या सामाजिक संगठन किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के अधिकार दिलाने के लिए न्यायालय जा सकता है, अगर ये व्यक्ति/समूह निर्धनता, अज्ञानता अथवा अपनी सामाजिक-आर्थिक रूप से प्रतिकूल दशाओं के कारण न्यायालय उपचार के लिए नही जा सकते।’’