Correct Answer:
Option A - किरातार्जुनीयम के प्रथम पद्य का छन्द वंशस्थ है। इसमें कुल 18 सर्ग है। इसमें किरात वेशधारीशिव का अर्जुन के साथ युद्ध एवं प्रसन्न शिव से पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है। वंशस्थ छन्द का लक्षण है– ‘‘जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ’’।
A. किरातार्जुनीयम के प्रथम पद्य का छन्द वंशस्थ है। इसमें कुल 18 सर्ग है। इसमें किरात वेशधारीशिव का अर्जुन के साथ युद्ध एवं प्रसन्न शिव से पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है। वंशस्थ छन्द का लक्षण है– ‘‘जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ’’।