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Q: कर्मवाच्य है
  • A. आम खाया जाता है
  • B. लड़का खाता है
  • C. धूप में चला नहीं जाता
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - ‘आम खाया जाता है।’ कर्म वाच्य है। ⇒ वाच्य-क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते है, जिसके द्वारा इस बात को बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म अथवा भाव-इनमें से किसती प्रधानता है, इनमें किसके अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आए है। ⇒ वाच्य के भेद-वाच्य के भेद इस प्रकार है-कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य। ⇒ कर्तृवाच्य-क्रिया के उस रूपान्तरण को कर्तृवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो। जैसे-लड़का खाता है। ⇒ कर्मवाच्य-क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो। जैसे-पुस्तक पढ़ी जाती है; आम खाया जाता है। ⇒ भाववाच्य-क्रिया के उस रूपान्तर को भाववाच्य कहते है, जिससे वाक्य में क्रिया अथवा भाव की प्रधानता का बोध हो। जैसे-मुझसे बैठा नहीं जाता, धूप में चला नहीं जाता।
A. ‘आम खाया जाता है।’ कर्म वाच्य है। ⇒ वाच्य-क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते है, जिसके द्वारा इस बात को बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म अथवा भाव-इनमें से किसती प्रधानता है, इनमें किसके अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आए है। ⇒ वाच्य के भेद-वाच्य के भेद इस प्रकार है-कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य। ⇒ कर्तृवाच्य-क्रिया के उस रूपान्तरण को कर्तृवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो। जैसे-लड़का खाता है। ⇒ कर्मवाच्य-क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो। जैसे-पुस्तक पढ़ी जाती है; आम खाया जाता है। ⇒ भाववाच्य-क्रिया के उस रूपान्तर को भाववाच्य कहते है, जिससे वाक्य में क्रिया अथवा भाव की प्रधानता का बोध हो। जैसे-मुझसे बैठा नहीं जाता, धूप में चला नहीं जाता।

Explanations:

‘आम खाया जाता है।’ कर्म वाच्य है। ⇒ वाच्य-क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते है, जिसके द्वारा इस बात को बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म अथवा भाव-इनमें से किसती प्रधानता है, इनमें किसके अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आए है। ⇒ वाच्य के भेद-वाच्य के भेद इस प्रकार है-कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य। ⇒ कर्तृवाच्य-क्रिया के उस रूपान्तरण को कर्तृवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो। जैसे-लड़का खाता है। ⇒ कर्मवाच्य-क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते है, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो। जैसे-पुस्तक पढ़ी जाती है; आम खाया जाता है। ⇒ भाववाच्य-क्रिया के उस रूपान्तर को भाववाच्य कहते है, जिससे वाक्य में क्रिया अथवा भाव की प्रधानता का बोध हो। जैसे-मुझसे बैठा नहीं जाता, धूप में चला नहीं जाता।