Explanations:
‘कोऽन्यो हुतवहाद् दग्धुं प्रभवति?’ इति अनसूया कथयति। यह सूक्ति ‘महाकवि कालिदास विरचित ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के चतुर्थ अंक से उद्धृत है। ‘अग्नि के अतिरिक्त और कौन जला सकता है? यह कथन अनसूया का है। शकुन्तला - ‘वत्स किं सहवास परित्यागिनीं मामनुसरसि। प्रियंवदा- ‘को नामोष्णोदकेन नवमालिकां सिञ्चति?’ गौतमी- ‘भगवन्! वर: खल्वेष: नाशी:।’ नोट–इस प्रश्न का उत्तर आयोग ने a&c दोनों माना है। क्योंकि इस प्रश्न के उत्तर अनसूया एवं प्रियंवदा दोनों विभिन्न पुस्तकों में मिलते हैं।