Correct Answer:
Option D - ‘कामायनी’ में कुल 15 सर्ग हैं। ‘कामायनी’ छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य है। शान्तिप्रिय द्विवेदी ने इसे ‘छायावाद का उपनिषद्’ कहा है। इसके पन्द्रह सर्गों के नाम इस प्रकार हैं- 1. चिन्ता, 2. आशा, 3. श्रद्धा, 4. काम, 5. वासना, 6. लज्जा, 7. कर्म, 8. ईष्र्या 9. इड़ा, 10. स्वप्न, 11. संघर्ष, 12. निर्वेद, 13. दर्शन, 14. रहस्य, 15. आनन्द।
D. ‘कामायनी’ में कुल 15 सर्ग हैं। ‘कामायनी’ छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य है। शान्तिप्रिय द्विवेदी ने इसे ‘छायावाद का उपनिषद्’ कहा है। इसके पन्द्रह सर्गों के नाम इस प्रकार हैं- 1. चिन्ता, 2. आशा, 3. श्रद्धा, 4. काम, 5. वासना, 6. लज्जा, 7. कर्म, 8. ईष्र्या 9. इड़ा, 10. स्वप्न, 11. संघर्ष, 12. निर्वेद, 13. दर्शन, 14. रहस्य, 15. आनन्द।