search
Q: कालिदास के किस ग्रंथ में अमरकंटक के सौंदर्य का चित्रण किया गया है?
  • A. कुमारसम्भवम्
  • B. शाकुंतलम्
  • C. मेघदूतम्
  • D. ऋतुसंहार
Correct Answer: Option C - `मेघदूतम्' कालिदास की प्रसिद्ध रचना है, जिसमें नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक (आम्रकूट) के भावपूर्ण सौन्दर्य का वर्णन है। यहाँ कवि की कल्पना चरमोत्कर्ष पर प्रतीत होती है। कवि ने अचेतन मेघ से चेतन और समर्थेन्द्रय पुरुष का काम लिया है। मेघदूत में कुबेर द्वारा निष्कासित गंधर्व द्वारा रामगिरि पर्वत से हिमालय पर्वत तक अपनी प्रथम प्रेयसी को प्रणय संदेश भेजने के लिए मेघ को माध्यम बनाया गया है। इसमें शापित यक्ष की विरहजन्य मनोदशा का र्मािमक चित्रण है, यह कवि की शब्द चातुरी और मेघ शास्त्र की अभिज्ञता का ही चमत्कार है कि पाठकों को ऐसा प्रतीत होता है मानों मेघ ने ही यक्ष का संदेश पहुंचाया है। इसमें प्रकृति के सौन्दर्य को मानवीकृत करते हुए अत्यन्त सुन्दर ढंग से वर्णन किया गया है।
C. `मेघदूतम्' कालिदास की प्रसिद्ध रचना है, जिसमें नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक (आम्रकूट) के भावपूर्ण सौन्दर्य का वर्णन है। यहाँ कवि की कल्पना चरमोत्कर्ष पर प्रतीत होती है। कवि ने अचेतन मेघ से चेतन और समर्थेन्द्रय पुरुष का काम लिया है। मेघदूत में कुबेर द्वारा निष्कासित गंधर्व द्वारा रामगिरि पर्वत से हिमालय पर्वत तक अपनी प्रथम प्रेयसी को प्रणय संदेश भेजने के लिए मेघ को माध्यम बनाया गया है। इसमें शापित यक्ष की विरहजन्य मनोदशा का र्मािमक चित्रण है, यह कवि की शब्द चातुरी और मेघ शास्त्र की अभिज्ञता का ही चमत्कार है कि पाठकों को ऐसा प्रतीत होता है मानों मेघ ने ही यक्ष का संदेश पहुंचाया है। इसमें प्रकृति के सौन्दर्य को मानवीकृत करते हुए अत्यन्त सुन्दर ढंग से वर्णन किया गया है।

Explanations:

`मेघदूतम्' कालिदास की प्रसिद्ध रचना है, जिसमें नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक (आम्रकूट) के भावपूर्ण सौन्दर्य का वर्णन है। यहाँ कवि की कल्पना चरमोत्कर्ष पर प्रतीत होती है। कवि ने अचेतन मेघ से चेतन और समर्थेन्द्रय पुरुष का काम लिया है। मेघदूत में कुबेर द्वारा निष्कासित गंधर्व द्वारा रामगिरि पर्वत से हिमालय पर्वत तक अपनी प्रथम प्रेयसी को प्रणय संदेश भेजने के लिए मेघ को माध्यम बनाया गया है। इसमें शापित यक्ष की विरहजन्य मनोदशा का र्मािमक चित्रण है, यह कवि की शब्द चातुरी और मेघ शास्त्र की अभिज्ञता का ही चमत्कार है कि पाठकों को ऐसा प्रतीत होता है मानों मेघ ने ही यक्ष का संदेश पहुंचाया है। इसमें प्रकृति के सौन्दर्य को मानवीकृत करते हुए अत्यन्त सुन्दर ढंग से वर्णन किया गया है।