search
Q: कोहलबर्ग के अनुसार वह स्तर जिसमें बालक की नैतिकता दंड के भय से नियंत्रित रहती है, कहलाती है–
  • A. पूर्व-नैतिक अवस्था
  • B. परम्परागत नैतिक स्तर
  • C. आत्म-स्वीकृत नैतिक अवस्था
  • D. नैतिकता स्तर
Correct Answer: Option A - कोहलबर्ग के अनुसार वह स्तर जिसमें बालक की नैतिकता दण्ड के भय से नियंत्रित रहती है वह पूर्व नैतिक स्तर या पूर्व परम्परागत स्तर कहलाता है। इस स्तर पर बालक का नैतिक व्यवहार तीन सोपानों द्वारा नियंत्रित होता है– 1. आत्म केन्द्रित निर्णय 2. दण्ड तथा आज्ञापालन अभिमुखता 3. यांत्रिक सापेक्षिक अभिमुखता
A. कोहलबर्ग के अनुसार वह स्तर जिसमें बालक की नैतिकता दण्ड के भय से नियंत्रित रहती है वह पूर्व नैतिक स्तर या पूर्व परम्परागत स्तर कहलाता है। इस स्तर पर बालक का नैतिक व्यवहार तीन सोपानों द्वारा नियंत्रित होता है– 1. आत्म केन्द्रित निर्णय 2. दण्ड तथा आज्ञापालन अभिमुखता 3. यांत्रिक सापेक्षिक अभिमुखता

Explanations:

कोहलबर्ग के अनुसार वह स्तर जिसमें बालक की नैतिकता दण्ड के भय से नियंत्रित रहती है वह पूर्व नैतिक स्तर या पूर्व परम्परागत स्तर कहलाता है। इस स्तर पर बालक का नैतिक व्यवहार तीन सोपानों द्वारा नियंत्रित होता है– 1. आत्म केन्द्रित निर्णय 2. दण्ड तथा आज्ञापालन अभिमुखता 3. यांत्रिक सापेक्षिक अभिमुखता