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Q: ‘कहि न जाय का कहिए’ – आत्मकथा के लेखक हैं–
  • A. कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
  • B. राम विलाश शर्मा
  • C. भगवतीचरण वर्मा
  • D. विष्णु प्रभाकर
Correct Answer: Option C - ‘कहि न जाय का कहिए’ – आत्मकथा के लेखक भगवतीचरण वर्मा हैं। ‘तपती पगडंडियों पर पदयात्रा’ (1989) – आत्मकथा के लेखक–कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हैं। मुँडेर पर सूरज (प्रथम खण्ड), देर सबेर (द्वितीय खण्ड) आपस की बातें (तृतीय खण्ड)–आत्मकथा के लेखक रामविलास शर्मा हैं। पंखहीन (प्रथम खण्ड–2004), मुक्त गगन में (द्वितीय खण्ड-2004), पंछी उड़ गया (तृतीय खण्ड 2004) आत्मकथा के लेखक विष्णु प्रभाकर हैं।
C. ‘कहि न जाय का कहिए’ – आत्मकथा के लेखक भगवतीचरण वर्मा हैं। ‘तपती पगडंडियों पर पदयात्रा’ (1989) – आत्मकथा के लेखक–कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हैं। मुँडेर पर सूरज (प्रथम खण्ड), देर सबेर (द्वितीय खण्ड) आपस की बातें (तृतीय खण्ड)–आत्मकथा के लेखक रामविलास शर्मा हैं। पंखहीन (प्रथम खण्ड–2004), मुक्त गगन में (द्वितीय खण्ड-2004), पंछी उड़ गया (तृतीय खण्ड 2004) आत्मकथा के लेखक विष्णु प्रभाकर हैं।

Explanations:

‘कहि न जाय का कहिए’ – आत्मकथा के लेखक भगवतीचरण वर्मा हैं। ‘तपती पगडंडियों पर पदयात्रा’ (1989) – आत्मकथा के लेखक–कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हैं। मुँडेर पर सूरज (प्रथम खण्ड), देर सबेर (द्वितीय खण्ड) आपस की बातें (तृतीय खण्ड)–आत्मकथा के लेखक रामविलास शर्मा हैं। पंखहीन (प्रथम खण्ड–2004), मुक्त गगन में (द्वितीय खण्ड-2004), पंछी उड़ गया (तृतीय खण्ड 2004) आत्मकथा के लेखक विष्णु प्रभाकर हैं।