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Q: क: ‘पय:पूरपूरितान्यकूपारतलानि’ मरुकरोति?
  • A. योगिराज:
  • B. भगवान् काल:
  • C. शिववीर:
  • D. महमूद गजनवी
Correct Answer: Option B - भगवान काल: ‘पय:पूरपूरितान्यकूपारतलानि’ मरुकरोति। अर्थात् भगवान् महाकाल ‘जल प्रवाह से पूर्ण समुद्र तल को मरुभूमि बना देते हैं।’ यह कथन पं. अम्बिकादत्त व्यास के शिवराजविजय के ‘प्रथम नि:श्वास’ से है। इसमें भगवान महाकाल की विशेषता को प्रकट किया गया है। शिवराजविजय तीन विराम तथा बारह नि:श्वास में विभक्त है।
B. भगवान काल: ‘पय:पूरपूरितान्यकूपारतलानि’ मरुकरोति। अर्थात् भगवान् महाकाल ‘जल प्रवाह से पूर्ण समुद्र तल को मरुभूमि बना देते हैं।’ यह कथन पं. अम्बिकादत्त व्यास के शिवराजविजय के ‘प्रथम नि:श्वास’ से है। इसमें भगवान महाकाल की विशेषता को प्रकट किया गया है। शिवराजविजय तीन विराम तथा बारह नि:श्वास में विभक्त है।

Explanations:

भगवान काल: ‘पय:पूरपूरितान्यकूपारतलानि’ मरुकरोति। अर्थात् भगवान् महाकाल ‘जल प्रवाह से पूर्ण समुद्र तल को मरुभूमि बना देते हैं।’ यह कथन पं. अम्बिकादत्त व्यास के शिवराजविजय के ‘प्रथम नि:श्वास’ से है। इसमें भगवान महाकाल की विशेषता को प्रकट किया गया है। शिवराजविजय तीन विराम तथा बारह नि:श्वास में विभक्त है।