अभिकथन (A) : कुछ संस्कृतियों में पहले मासिक धर्म का आना उत्साह के साथ मनाया जाता है जबकि अन्य संस्कृतियों में इसे गुप्त रखा जाता है। तर्क (R) : बच्चों के लिए बचपन के अनुभव उनके सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों के आधार पर अलग तरह से होते हैं। सही विकल्प चुनें :
Choose the word opposite in meaning to the given word. HUMBLE
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एक जग में दो छिद्र है। पहला छिद्र जग को 15 मिनट में खाली करता है। दूसरा छिद्र जग को 20 मिनट में खाली करता है। यदि रिसाव एक निश्चित दर से हो रहा है, तो दोनों छिद्रो के द्वारा जग कितनी देर में खाली हो जाएगा?
Which of the following are not necessary the consequences of the proclamation of the President's rule in a State? किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा के अग्रलिखित में से कौन-से परिणामों का होना आवश्यक नहीं है? 1. Dissolution of the State Legislative Assembly/ राज्य विधान सभा का विघटन 2. Removal of the Council of Ministers in the State/राज्य के मंत्रिपरिषद का हटाया जाना 3. Dissolution of the local bodies/स्थानीय निकायों का विघटन Select the correct answer using the code given below: नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए–
बनारसी में कौन-सा विशेषण है?
`बंसत' के चार पर्याय दिये गये हैं। इनमें त्रुटिपूर्ण कौन है?
निर्देश- प्रश्न संख्या (162 से 169) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा अष्टप्रश्नानां यथोचितं विकल्पं चित्वा उत्तराणि देयानि- ते तत्र विश्वासमापन्ना: तात! मातुल! भ्रात! इति ब्रुवाणा अहं पूर्वमहं पूर्वमिति समन्तात् परितस्थु:। सोऽपि दृष्टाशय: क्रमेण तान् पृष्ठे आरोप्य जलाशयस्य नातिदूरे शिलां समासाद्य तस्यामाक्षिप्य स्वेच्छया भक्षयित्वा भूयोऽपि जलाशयं समासाद्य जलचराणां मिथ्यावार्तासन्देशकैर्मनांसि रञ्जयन्नित्यामिवाहारवृत्तिमकरोत्। अन्यस्मिन् दिने च कुलीरकेणोक्त:- ‘‘माम! मया सह ते प्रथम: स्नेहसम्भाष: सञ्जात:। तत् किं मां परित्यज्य अन्यान्नयसि। तस्मादद्य मे प्राणत्राणं कुरु’’ तदाकरण्य सोऽपि दुष्टाशयश्चिन्तितवान् । ‘‘निर्विणोऽहं मत्स्यमांसादनेन। तदद्य एनं कुलीरकं व्यञ्जनस्थाने करोमि’’। इति विचिन्त्य तं पृष्ठे समारोप्य तां वध्यशिलामुद्दिश्य प्रस्थित:। कुलीरकोऽपि दूरादेवास्थिपर्वतं शिलाश्रयमवलोक्य मत्स्यास्थीनि परिज्ञाय तमपृच्छत् - ‘‘माम! कियद्दूरे स जलाशय:? मदीयभारेण अतिश्रान्तस्त्वं तत् कथय’’। सोऽपि मन्दधीर्जलचरोऽप्यमिति मत्वा स्थले न प्रभवतीति सस्मितमिदमाह- ‘‘कुलीरक!’’ कुतोऽन्यो जलाशय: मम प्राणयात्रेयम् , तस्मात् स्मय्र्यतामात्मनोऽभीष्टदेवता। त्वामपि अस्यां शिलायां निक्षिप्य भक्षयिष्यामि’’। इत्युक्तवति तस्मिन् स्ववदनदंशद्वयेन मृणालनालधवलायां मृदुग्रीवायां गृहीतो मृतश्च। अथ स तां बकग्रीवां समादाय शनै: शनै: तज्जलाशयमाससाद। तत: सर्वैरेव जलचरै: पृष्ट:- ‘‘भो: कुलीरक! किं निवृत्तस्त्वम्?’’ स मातुलोऽपि न आयात:? तत् किं चिरयति? वयं सर्वे सोत्सुका: कृतक्षणास्ति ष्ठाम:’’। एवं तैरभिहिते कुलीरकोऽपि विहस्योवाच- ‘‘मूर्खा: सर्वे जलचरास्तेन मिथ्यावादिना वञ्चयित्वा नातिदूरे शिलातले प्रक्षिप्य भक्षिता:। तन्मया आयु: शेषतया तस्य विश्वासघातकस्य अभिप्रायं ज्ञात्वा ग्रीवेयमानीता। तदलं सम्भ्रमेण। अधुना सर्वजलचराणां क्षेमं भविष्यति’’। अतोऽहंब्रवीमि- ‘‘भक्षयित्वा बहून् मत्स्यान्’’ इति। मत्स्यमासभक्षणेन क: खिन्नोऽभवत् ?
कथनः केरल के लोग बहुत से व्यंजन नारियल तेल में पकाते हैं। निष्कर्षः 1. नारियल तेल, बहुत से व्यंजन मे उपयोग होने वाला देश का प्रमुख तेल है। 2. केरल नारियल तेल का एक बड़ा उपभोक्ता है।
प्राचीनकाले गुरु: स्व-शिष्यान् केन विधिना शिक्षयति स्म?
Explanations:
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