Correct Answer:
Option B - जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है। जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है।
B. जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है। जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है।