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Q: जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कहते हैं :
  • A. कर्तृवाच्य
  • B. कर्मवाच्य
  • C. भाववाच्य
  • D. संयुक्तवाच्य
Correct Answer: Option B - जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है। जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है।
B. जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है। जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है।

Explanations:

जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है। जिस वाक्य में कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन होता है, उस वाक्य को कर्मवाच्य कहते हैं जैसे-अनुभा द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी। क्रिया के जिस रूपान्तर से वाक्य में कर्ता की प्रधानता हो वहाँ कर्तृवाच्य होता है; जैसे– लड़का खाता है। क्रिया का वह रूपान्तर जिससे वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो, उसे भाववाच्य कहते हैं; जैसे-राम से टहला नहीं जाता है।