Correct Answer:
Option B - खोखली दीवार (Cavity wall)– ये दीवारे मध्य भाग में खोखली होती है। खोखली दीवार में दो फलको को खड़ी की जाती है। जिनके मध्य न्यूनतम 50 मिमी. और अधिकतम 115 मिमी. का खाली स्थान छोड़ा जाता है। खोखली दीवार का बाहरी फलक 10सेमी. मोटी रखी जाती है और अंदर की फलक की मोटाई दीवार पर पड़ने वाले अध्यारोपित भार के अनुसार रखी जाती है। परन्तु यह 10 सेमी. से कम नहीं होनी चाहिये।
खोखली दीवार के लाभ–
–खोखली दीवार के दोनों फलको के मध्य खाली जगह विसंवाही का कार्य करती है। अत: बाहर से ठण्ड, सीलन ताप शोर कमरे के भीतर नहीं आ पाते।
–खोखली दीवारों से बने कमरो पर बाहरी ताप परिवर्तन का प्रभाव कम पड़ता है। यह भवन गर्मी में ठण्डे तथा जाड़े में गर्म रहते है।
B. खोखली दीवार (Cavity wall)– ये दीवारे मध्य भाग में खोखली होती है। खोखली दीवार में दो फलको को खड़ी की जाती है। जिनके मध्य न्यूनतम 50 मिमी. और अधिकतम 115 मिमी. का खाली स्थान छोड़ा जाता है। खोखली दीवार का बाहरी फलक 10सेमी. मोटी रखी जाती है और अंदर की फलक की मोटाई दीवार पर पड़ने वाले अध्यारोपित भार के अनुसार रखी जाती है। परन्तु यह 10 सेमी. से कम नहीं होनी चाहिये।
खोखली दीवार के लाभ–
–खोखली दीवार के दोनों फलको के मध्य खाली जगह विसंवाही का कार्य करती है। अत: बाहर से ठण्ड, सीलन ताप शोर कमरे के भीतर नहीं आ पाते।
–खोखली दीवारों से बने कमरो पर बाहरी ताप परिवर्तन का प्रभाव कम पड़ता है। यह भवन गर्मी में ठण्डे तथा जाड़े में गर्म रहते है।