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Q: जैन धर्म के अनेक तीर्थंकर किस सचित्र पोथी में चित्रित हैं?
  • A. वसन्त विलास
  • B. चित्रकल्पद्रुम
  • C. कालाकाचार्य कथा
  • D. उपर्युक्त में से किसी में नहीं
Correct Answer: Option C - राजपूत परम्परा की भाँति जैन कला भी ऐसी प्राचीन परम्परा पर आधारित है, जो राजपूत कलम में प्राप्त सर्वाधिक प्राचीन चित्रों में से भी एक शताब्दी पहले ही सिद्ध होती है। ताड़पत्र पर अंकित `कल्पसूत्र' तथा `कालकाचार्यकथा' के आधार पर र्नििमत `पाश्र्वनाथ', `नेमीनाथ' और `ऋषभनाथ' तथा अन्य बीस तीर्थंकर महात्माओं के दृष्टान्त चित्र जैनकला के सर्वाधिक प्राचीन उदाहरण हैं।
C. राजपूत परम्परा की भाँति जैन कला भी ऐसी प्राचीन परम्परा पर आधारित है, जो राजपूत कलम में प्राप्त सर्वाधिक प्राचीन चित्रों में से भी एक शताब्दी पहले ही सिद्ध होती है। ताड़पत्र पर अंकित `कल्पसूत्र' तथा `कालकाचार्यकथा' के आधार पर र्नििमत `पाश्र्वनाथ', `नेमीनाथ' और `ऋषभनाथ' तथा अन्य बीस तीर्थंकर महात्माओं के दृष्टान्त चित्र जैनकला के सर्वाधिक प्राचीन उदाहरण हैं।

Explanations:

राजपूत परम्परा की भाँति जैन कला भी ऐसी प्राचीन परम्परा पर आधारित है, जो राजपूत कलम में प्राप्त सर्वाधिक प्राचीन चित्रों में से भी एक शताब्दी पहले ही सिद्ध होती है। ताड़पत्र पर अंकित `कल्पसूत्र' तथा `कालकाचार्यकथा' के आधार पर र्नििमत `पाश्र्वनाथ', `नेमीनाथ' और `ऋषभनाथ' तथा अन्य बीस तीर्थंकर महात्माओं के दृष्टान्त चित्र जैनकला के सर्वाधिक प्राचीन उदाहरण हैं।