Explanations:
राजपूत परम्परा की भाँति जैन कला भी ऐसी प्राचीन परम्परा पर आधारित है, जो राजपूत कलम में प्राप्त सर्वाधिक प्राचीन चित्रों में से भी एक शताब्दी पहले ही सिद्ध होती है। ताड़पत्र पर अंकित `कल्पसूत्र' तथा `कालकाचार्यकथा' के आधार पर र्नििमत `पाश्र्वनाथ', `नेमीनाथ' और `ऋषभनाथ' तथा अन्य बीस तीर्थंकर महात्माओं के दृष्टान्त चित्र जैनकला के सर्वाधिक प्राचीन उदाहरण हैं।