Explanations:
जीन पियाजे के सिद्धान्त का प्रमुख प्रस्ताव यह है कि बच्चों की सोच गुणात्मक रूप में वयस्कों से भिन्न होती है। जीन पियाजे ने इस बात पर बल दिया है कि बच्चे संसार के बारे में अपनी समझ की रचना सक्रिय रूप से करते हैं। पियाजे का मानना है कि प्रत्येक अवस्था चिंतन के एक विशिष्ट तरीके से परिभाषित होती है एवं आयु से संबद्ध रहती है। यह स्मरण रखना महत्वपूर्ण है कि यह चिंतन का अलग तरीका है तथा गुणात्मक रूप से भिन्न होती हैं न कि मात्रात्मक रूप से जो एक अवस्था को दूसरी अवस्था से अधिक उच्च बनाती हैं।