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Q: जीन पियाजे के अनुसार, बच्चे–
  • A. प्रेक्षणात्मक अधिगम की प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए दूसरों का अवलोकन करके सीखते हैं।
  • B. को उद्दीपन-अनुक्रिया संबंधों के सावधानीपूर्ण नियंत्रण के द्वारा एक विशेष तरीके से व्यवहार करने के लिए अनुबंधित किया जा सकता है।
  • C. को पुरस्कार एवं दण्ड के सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए विशिष्ट तरीके से व्यवहार करना एवं सीखना सिखाया जा सकता है।
  • D. ज्ञान को सक्रिय रूप से संरचित करते हैं, जैसे-जैसे वे दुनिया में व्यवहार कौशल का प्रयोग करते हैं तथा अन्वेषण करते हैं।
Correct Answer: Option D - जीन पियाजे के अनुसार, बच्चे ज्ञान को सक्रिय रूप से संरचित करते हैं, वे दुनिया में व्यवहार कौशल का प्रयोग करते हैं तथा अन्वेषण करते हैं। पियाजे के अनुसार बालकों में वास्तविकता के स्वरूप में चिंतन करने, उसकी खोज करने, उसके बारे में समझ बनाने तथा उनके बारे में सूचनाएँ एकत्रित करने की क्षमता, बालक के परिपक्वता स्तर तथा बालक के अनुभवों की पारस्परिक अंत:क्रिया द्वारा निर्धारित होती है। बालक अपने विश्व की ज्ञान रचना में ‘स्कीमा’ का प्रयोग करता है।
D. जीन पियाजे के अनुसार, बच्चे ज्ञान को सक्रिय रूप से संरचित करते हैं, वे दुनिया में व्यवहार कौशल का प्रयोग करते हैं तथा अन्वेषण करते हैं। पियाजे के अनुसार बालकों में वास्तविकता के स्वरूप में चिंतन करने, उसकी खोज करने, उसके बारे में समझ बनाने तथा उनके बारे में सूचनाएँ एकत्रित करने की क्षमता, बालक के परिपक्वता स्तर तथा बालक के अनुभवों की पारस्परिक अंत:क्रिया द्वारा निर्धारित होती है। बालक अपने विश्व की ज्ञान रचना में ‘स्कीमा’ का प्रयोग करता है।

Explanations:

जीन पियाजे के अनुसार, बच्चे ज्ञान को सक्रिय रूप से संरचित करते हैं, वे दुनिया में व्यवहार कौशल का प्रयोग करते हैं तथा अन्वेषण करते हैं। पियाजे के अनुसार बालकों में वास्तविकता के स्वरूप में चिंतन करने, उसकी खोज करने, उसके बारे में समझ बनाने तथा उनके बारे में सूचनाएँ एकत्रित करने की क्षमता, बालक के परिपक्वता स्तर तथा बालक के अनुभवों की पारस्परिक अंत:क्रिया द्वारा निर्धारित होती है। बालक अपने विश्व की ज्ञान रचना में ‘स्कीमा’ का प्रयोग करता है।