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Q: जैन चित्रकला भारत के किस क्षेत्र की है?
  • A. उत्तर
  • B. पूर्व
  • C. पश्चिम
  • D. मध्य
Correct Answer: Option C - श्वेताम्बर जैन धर्म की अनेक सचित्र पोथियाँ 1100 ई. से 1500 ई. के मध्य विशेष रूप से लिखी गयी। इस प्रकार की चित्रित पोथियों से भविष्य की कला शैली की एक आधारशिला तैयार होने लगी थी, इस कारण इस कला का ऐतिहासिक महत्व है, इस शैली के नाम के सम्बन्ध में अनेक विवाद हैं और इस शैली को जैन शैली, गुजरात शैली, पश्चिम भारत शैली ( पश्चिमी भारतीय शैली) तथा अपभ्रंश शैली के नाम से पुकारा गया है।
C. श्वेताम्बर जैन धर्म की अनेक सचित्र पोथियाँ 1100 ई. से 1500 ई. के मध्य विशेष रूप से लिखी गयी। इस प्रकार की चित्रित पोथियों से भविष्य की कला शैली की एक आधारशिला तैयार होने लगी थी, इस कारण इस कला का ऐतिहासिक महत्व है, इस शैली के नाम के सम्बन्ध में अनेक विवाद हैं और इस शैली को जैन शैली, गुजरात शैली, पश्चिम भारत शैली ( पश्चिमी भारतीय शैली) तथा अपभ्रंश शैली के नाम से पुकारा गया है।

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श्वेताम्बर जैन धर्म की अनेक सचित्र पोथियाँ 1100 ई. से 1500 ई. के मध्य विशेष रूप से लिखी गयी। इस प्रकार की चित्रित पोथियों से भविष्य की कला शैली की एक आधारशिला तैयार होने लगी थी, इस कारण इस कला का ऐतिहासिक महत्व है, इस शैली के नाम के सम्बन्ध में अनेक विवाद हैं और इस शैली को जैन शैली, गुजरात शैली, पश्चिम भारत शैली ( पश्चिमी भारतीय शैली) तथा अपभ्रंश शैली के नाम से पुकारा गया है।