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Q: जब वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ से भी शब्द के अर्थ का बोध न हो, तब उसका बोध कराने वाली शक्ति कहलाती है
  • A. लक्षणा
  • B. व्यंजना
  • C. अभिधा
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - जब वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ से भी शब्द के अर्थ का बोध न हो, तब उसका बोध कराने वाली शक्ति व्यंजना शब्द शक्ति कहलाती है। व्यंग्यार्थ के लिए ध्वन्यर्थ, सूच्यर्थ, आक्षेपार्थ, प्रतीयमानार्थ-जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। अभिधा और लक्षणा का संबंध केवल शब्द से ही है, किन्तु व्यंजना शब्द और अर्थ दोनों पर आधृत है। उदाहरणार्थ- रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती मानुस चून।। अभिधा शब्द शक्ति-आचार्य मम्मट के अनुसार, साक्षात्, संकेतित (गुण, जाति, द्रव्य, क्रियावाचक) अर्थ का बोध कराने वाले व्यापार को ‘अभिधा शक्ति’ कहते है। इससे जिस अर्थ का बोध होता है, उसे ‘अभिधेयार्थ’ कहते है। तात्पर्य यह कि ‘अभिधा शब्द की वह शक्ति है, जो शब्द के साधारण और व्यावहारिक अर्थ को प्रकट करती है-जैसे-गधा। इस शब्द का साधारण और व्यावहारिक अर्थ है ‘लंबे कान वाला पशु विशेष। लक्षण शब्द शक्ति-आचार्य मम्मट के अनुसार, मुख्य अर्थ के बाधित होने पर रूढि़ अथवा प्रयोजन के कारण जिस क्रिया या शक्ति से मुख्य अर्थ से सम्बन्ध रखने वाला अन्य अर्थ लक्षित हो, उसे लक्षणा शक्ति कहते है। मम्मट के अनुसार लक्षणा के दो भेद है-(1) रूढ़ा लक्षणा (2) प्रयोजनवती लक्षणा, उदाहरण-देवदत्त चौकन्ना हो गया।
B. जब वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ से भी शब्द के अर्थ का बोध न हो, तब उसका बोध कराने वाली शक्ति व्यंजना शब्द शक्ति कहलाती है। व्यंग्यार्थ के लिए ध्वन्यर्थ, सूच्यर्थ, आक्षेपार्थ, प्रतीयमानार्थ-जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। अभिधा और लक्षणा का संबंध केवल शब्द से ही है, किन्तु व्यंजना शब्द और अर्थ दोनों पर आधृत है। उदाहरणार्थ- रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती मानुस चून।। अभिधा शब्द शक्ति-आचार्य मम्मट के अनुसार, साक्षात्, संकेतित (गुण, जाति, द्रव्य, क्रियावाचक) अर्थ का बोध कराने वाले व्यापार को ‘अभिधा शक्ति’ कहते है। इससे जिस अर्थ का बोध होता है, उसे ‘अभिधेयार्थ’ कहते है। तात्पर्य यह कि ‘अभिधा शब्द की वह शक्ति है, जो शब्द के साधारण और व्यावहारिक अर्थ को प्रकट करती है-जैसे-गधा। इस शब्द का साधारण और व्यावहारिक अर्थ है ‘लंबे कान वाला पशु विशेष। लक्षण शब्द शक्ति-आचार्य मम्मट के अनुसार, मुख्य अर्थ के बाधित होने पर रूढि़ अथवा प्रयोजन के कारण जिस क्रिया या शक्ति से मुख्य अर्थ से सम्बन्ध रखने वाला अन्य अर्थ लक्षित हो, उसे लक्षणा शक्ति कहते है। मम्मट के अनुसार लक्षणा के दो भेद है-(1) रूढ़ा लक्षणा (2) प्रयोजनवती लक्षणा, उदाहरण-देवदत्त चौकन्ना हो गया।

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जब वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ से भी शब्द के अर्थ का बोध न हो, तब उसका बोध कराने वाली शक्ति व्यंजना शब्द शक्ति कहलाती है। व्यंग्यार्थ के लिए ध्वन्यर्थ, सूच्यर्थ, आक्षेपार्थ, प्रतीयमानार्थ-जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। अभिधा और लक्षणा का संबंध केवल शब्द से ही है, किन्तु व्यंजना शब्द और अर्थ दोनों पर आधृत है। उदाहरणार्थ- रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती मानुस चून।। अभिधा शब्द शक्ति-आचार्य मम्मट के अनुसार, साक्षात्, संकेतित (गुण, जाति, द्रव्य, क्रियावाचक) अर्थ का बोध कराने वाले व्यापार को ‘अभिधा शक्ति’ कहते है। इससे जिस अर्थ का बोध होता है, उसे ‘अभिधेयार्थ’ कहते है। तात्पर्य यह कि ‘अभिधा शब्द की वह शक्ति है, जो शब्द के साधारण और व्यावहारिक अर्थ को प्रकट करती है-जैसे-गधा। इस शब्द का साधारण और व्यावहारिक अर्थ है ‘लंबे कान वाला पशु विशेष। लक्षण शब्द शक्ति-आचार्य मम्मट के अनुसार, मुख्य अर्थ के बाधित होने पर रूढि़ अथवा प्रयोजन के कारण जिस क्रिया या शक्ति से मुख्य अर्थ से सम्बन्ध रखने वाला अन्य अर्थ लक्षित हो, उसे लक्षणा शक्ति कहते है। मम्मट के अनुसार लक्षणा के दो भेद है-(1) रूढ़ा लक्षणा (2) प्रयोजनवती लक्षणा, उदाहरण-देवदत्त चौकन्ना हो गया।