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Q: जब किसी समास में दोनों शब्द प्रधान हों तो उसको कहते हैं–
  • A. द्वन्द्व समास
  • B. द्विगु समास
  • C. प्रधान समास
  • D. तत्पुरुष समास
Correct Answer: Option A - द्वन्द्व समास - जिसके दोनों पद प्रधान होते हैं, दोनो संज्ञाएँ अथवा विशेषण हो वह द्वन्द्व समास कहलाता है। इसका विग्रह करने के लिए दो पदों के बीच ‘और’ अथवा ‘या’ जैसा योजक अव्यय लिखा जाता है। रात-दिन = रात और दिन सीता-राम = सीता और राम द्विगु समास - जिस समास का प्रथम पद संख्यावाचक और अन्तिम पद संज्ञा हो, उसे द्विगुसमास कहते हैं। त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार चतुर्वेद = चार वेदों का समाहार तत्पुरुष समास - जिस समास का अन्तिम पद प्रधान होता है। उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें बाद वाले पद की प्रधानता रहती है। कत्र्ताकारक और सम्बोधन को छोड़कर शेष सभी कारकों में विभक्तियाँ लगाकर इनका समास विग्रह होता है। स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त गृहागत = गृह को आगत मेघाच्छन्न = मेघ से आच्छन्न
A. द्वन्द्व समास - जिसके दोनों पद प्रधान होते हैं, दोनो संज्ञाएँ अथवा विशेषण हो वह द्वन्द्व समास कहलाता है। इसका विग्रह करने के लिए दो पदों के बीच ‘और’ अथवा ‘या’ जैसा योजक अव्यय लिखा जाता है। रात-दिन = रात और दिन सीता-राम = सीता और राम द्विगु समास - जिस समास का प्रथम पद संख्यावाचक और अन्तिम पद संज्ञा हो, उसे द्विगुसमास कहते हैं। त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार चतुर्वेद = चार वेदों का समाहार तत्पुरुष समास - जिस समास का अन्तिम पद प्रधान होता है। उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें बाद वाले पद की प्रधानता रहती है। कत्र्ताकारक और सम्बोधन को छोड़कर शेष सभी कारकों में विभक्तियाँ लगाकर इनका समास विग्रह होता है। स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त गृहागत = गृह को आगत मेघाच्छन्न = मेघ से आच्छन्न

Explanations:

द्वन्द्व समास - जिसके दोनों पद प्रधान होते हैं, दोनो संज्ञाएँ अथवा विशेषण हो वह द्वन्द्व समास कहलाता है। इसका विग्रह करने के लिए दो पदों के बीच ‘और’ अथवा ‘या’ जैसा योजक अव्यय लिखा जाता है। रात-दिन = रात और दिन सीता-राम = सीता और राम द्विगु समास - जिस समास का प्रथम पद संख्यावाचक और अन्तिम पद संज्ञा हो, उसे द्विगुसमास कहते हैं। त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार चतुर्वेद = चार वेदों का समाहार तत्पुरुष समास - जिस समास का अन्तिम पद प्रधान होता है। उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें बाद वाले पद की प्रधानता रहती है। कत्र्ताकारक और सम्बोधन को छोड़कर शेष सभी कारकों में विभक्तियाँ लगाकर इनका समास विग्रह होता है। स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त गृहागत = गृह को आगत मेघाच्छन्न = मेघ से आच्छन्न