यदि a और b दोनों धनात्मक पूर्णांक हैं, तो निम्नलिखित समीकरणों से हमें 'a' का मान ज्ञात करना होगा। 1. 2a + b = 22, 2. 3a – 2b = 12 अब, निम्नलिखित विकल्प पढ़ें और उनमें से जो भी विकल्प लागू हो, उसका चयन कीजिए।
The ratio of present ages of A and B is 5 : 3. 9 years before the ratio of their ages was 23:12. What will be the ratio of their ages after 15 years?
Which epic is considered the world's largest epic?
The ratio of the number of turns in primary and secondary coils of transformer is 1 : 20. The ratio of the currents in the primary and the secondary coils will be एक ट्रांसफॉमर के प्राथमिक और द्वितीयक कुण्डलों में घुमावों की संख्या 1 : 20 के अनुपात में है। प्राथमिक और द्वितीयक कुण्डली में धारा का अनुपात होगा–
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Who was the President of India when the eligibility age for the right to vote was reduced from 21 years to 18 years?
A number was divided by 8, instead of being multiplied by 8. As a result of this, there was an error in the answer. What is the percentage difference (correct to two places of decimal) in the answer due to this miscalculation?
इनमें से ‘अरण्य’ शब्द का पर्यायवाची शब्द है
किसी निश्चित धनराशि को चक्रवृद्धि ब्याज पर निवेश किया गया, 2 वर्षों के लिए 4% वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज की दर से यह राशि `338 हो जाती है। राशि ज्ञात कीजिए।
निर्देश: अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानां (प्रश्न संख्या 276-285) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: समुचितम्। उत्तरं चित्वा लिखत। अनादिकालात् प्रचलन्त्याम् अस्माकम् परम्परायां बहव: वैदिका: ऋषय: अभवन्। महर्षि: वसिष्ठ: महर्षि: विश्वामित्र: च वैदिक-कालीनौ ऋषी आस्ताम्। उचिते वयसि यथोचितं व्रतं पालयन्तौ तौ महान्तौ तपस्विनौ अभवताम्। योग्याद् गुरो: स्वाध्यायम् अधीयानौ तौ ज्ञानिनौ सञ्जातौ। एवं तयो: उभयो: पाश्र्वे तु ज्ञानस्य भण्डार एव आसीत्। अनयो: महर्षि: विश्वामित्र: स्वभावेन क्रोधी आसीत्। परन्तु उग्राणि तपांसि समाचरता तेन ब्रह्मर्षिषु स्थानं प्राप्तम्। प्रसिद्धं गायत्री-मन्त्रं समाजाय प्रयच्छता तेन अचिरात् प्रसिद्धि: लब्धा। जपत: जनान् अभीष्टफलं प्रददती गायत्रीलोके कामधेनुरूपेण प्रसिद्धं प्राप्तवती। मुक्तिं कामयमानौ: जनै: गायत्री-मन्त्रस्य शक्त्या भास्वत: सूर्यदेवात् सद्बुद्धि प्राथ्र्यते। महर्षि: वसिष्ठ: सततं ब्रह्म उपासीन: महतीं सिद्धि प्राप्तवान्। वसिष्ठेन मृत्युं वशीकुर्वत: महामृत्यृञ्जयमन्त्रस्य रचना कृता। एकदा सतसङ्ग तपश्चरणयो: मध्ये कतर: श्रेष्ठ: इति विषये विवाद: अभवत्। वसिष्ठ: सत्सङ्गस्य पक्षे आसीत्। विश्वामित्रस्य तु स्वतपस्यायाम् अभिमान: आसीत्। परस्परं विवादमानयो: एतयो: विवादे असमाहिते च तौ क्षीरसागरे भगवत: शेषनागस्य सविधे निर्णयार्थम् अगच्छताम्। शेषनाग: द्वयोर्मध्य सत्सङ्ग: एव श्रेयान् इत्युक्त्वा विवादस्य समाधानं कृतवान्।विश्वामित्रेण महर्षे: पदं कथं लब्धम्?
Explanations:
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