Correct Answer:
Option B - ‘इत्थंभूतलक्षणे’ इति सूत्रेण ‘तृतीया’ विभक्ति: विधीयते। ‘इत्थंभूतलक्षणे’ इस सूत्र से तृतीया विभक्ति होती है। अर्थात् जब कोई (व्यक्ति या वस्तु) किसी विशेष चिह्न (लक्षण) से ज्ञापित हो, तब जिस चिह्न (लक्षण) से वह ज्ञापित (पहचाना जाता) हो, उस चिह्न विशेष में तृतीया विभक्ति लगती है।
जैसे- जटाभि: तापस: या धनुषा वीर: आदि उदाहरणों में जटाभि:, धनुषा में तृतीया विभक्ति है क्योंकि ये तपस्वी, वीर को सूचित करते हैं।
इसी प्रकार,
(1) ‘कर्मणि द्वितीया’ से द्वितीया विभक्ति
(2) ‘अपादाने पञ्चमी’ से पञ्चमी विभक्ति
(3) ‘सप्तम्यधिकरणे च’ से सप्तमी विभक्ति
B. ‘इत्थंभूतलक्षणे’ इति सूत्रेण ‘तृतीया’ विभक्ति: विधीयते। ‘इत्थंभूतलक्षणे’ इस सूत्र से तृतीया विभक्ति होती है। अर्थात् जब कोई (व्यक्ति या वस्तु) किसी विशेष चिह्न (लक्षण) से ज्ञापित हो, तब जिस चिह्न (लक्षण) से वह ज्ञापित (पहचाना जाता) हो, उस चिह्न विशेष में तृतीया विभक्ति लगती है।
जैसे- जटाभि: तापस: या धनुषा वीर: आदि उदाहरणों में जटाभि:, धनुषा में तृतीया विभक्ति है क्योंकि ये तपस्वी, वीर को सूचित करते हैं।
इसी प्रकार,
(1) ‘कर्मणि द्वितीया’ से द्वितीया विभक्ति
(2) ‘अपादाने पञ्चमी’ से पञ्चमी विभक्ति
(3) ‘सप्तम्यधिकरणे च’ से सप्तमी विभक्ति