Select the Venn diagram that best represents the relationship between the following classes. Music, Dance, Sound
What is the atomic radius of hydrogen atom ? हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या क्या होती है ?
वह प्रक्रिया जिसमें युवा पीढ़ी रो़जमर्रा की अंत:क्रिया से सामाजिक प्रक्रियाओं को सीखती है, क्या कहलाती है?
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एक टीवी सेट का वास्तविक मूल्य ₹9,000 है। इसके मूल्य में 20% की छूट दी जाती है और फिर इसे 10% बढ़ाया जाता है। इसका नया मूल्य ज्ञात कीजिए।
What is a destructive cyber attack without any obvious profit or ideological motive known as? बिना किसी स्पष्ट लाभ या वैचारिक उद्देश्य के विनाशकारी साइबर हमले को क्या कहा जाता है?
निम्नलिखित जनजातियों में से किसकी संख्या उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक है?
The volume of the right prism with an area of base 121 m² and height 23 m is 121 वर्क मीटर आधार क्षेत्रफल और 23 मीटर ऊँचाई वाले लम्ब प्रिज्म का आयतन है।
Which one of the following drainage pattern develops where hard and soft rock are found parallel to each other? जहाँ कठोर तथा नरम चट्टान एक दूसरे के समानांतर पायी जाती है वहा निम्नलिखित में से कौन सा अपवाह प्रतिरूप विकसित होता है?
निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा अष्टप्रश्नानाम् यथोचितं विकल्पं चित्वा उत्तराणि देयानि- वायसोऽवदत्-‘सखे मन्थर ! सविशेषपूजामस्मै विधेहि। यतोेऽयं पुण्यकर्मणा धुरीण: कारुण्यरत्नाकरो हिरणयकनामा मूषिकराज:। एतस्य गुणस्तुतिं जिह्वासहस्रद्वयेनापि सर्पराजो न कदाचित्कथयितुं समर्थ: स्यात् । ’इत्युक्तवा चित्रग्रीवोपाख्यानं वर्णितवान् । मन्थर: सादरं हिरण्यकं संपूज्याह-‘ भद्र ! आत्मनो निर्जनवनागमनकारणमाख्यातुमर्हसि।’ हिरण्यकोऽवदत् - ‘कथयामि। श्रूयताम् - अस्ति चम्पकाभिधानायां नगर्यां परिव्राजकावसथ:। तत्र चूडाकर्णो नाम परिव्राट् प्रतिवसति। स च भोजनावशिष्टभिक्षापात्रसहितं भिक्षापात्रं नागदन्तकेऽवस्थाप्य स्वपिति। अहं च तदन्नमुत्प्लुत्य प्रत्यहं भक्षयामि। अनन्तरं तस्य प्रिय सुहृद्वीणाकर्णो नामपरिव्राजक: समायात:। तेन सह कथाप्रसङ्गावस्थितो मम त्रासार्थं जर्जरवंशखण्डेन चूडाकर्णो भूमिमताडयत् । वीणाकर्ण उवाच-‘सखे! किमिति मम कथाविरक्तोऽन्यासक्तो भवान्?’ चूडाकर्णेनोक्तम् - ‘ मित्र ! नाहं विरक्त: । किन्तु पश्यायं भूषिको ममापकारी सदा पात्रस्थं भिक्षान्नामुत्प्लुत्य भक्षयति। ‘वीणाकर्णो नागदन्तककं विलोक्याह- ‘कथं मूषिक: स्वल्पबलोऽप्येतावद्दूरमुत्पतति? तदत्र केनापि कारणेन भवितव्यम् । चम्पकाभिधानायां नगर्याम् कौ परिव्राजकौ आवसताम्
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