Correct Answer:
Option A - आंतरिक मितव्ययतायें तब उत्पन्न होती हैं, जब फर्म श्रम विभाजन लागू करती है। चैम्बरलिन का मत है कि जब उत्पादन के सभी साधनों की मात्रा बढ़ायी जाती है तो उत्पादन का पैमाना बढ़ जाता है साधनों के अधिक मात्रा में प्रयोग से विशिष्टीकरण की सम्भावना तथा अत्यधिक कुशल साधनों विशेष रूप से उत्तम मशीनों के प्रयोग की सुविधा, उत्पादन के पैमाने में वृद्धि के कारण स्थान विशेष पर कच्चे माल की उपलब्धता, अधोसंरचना का विकास, उत्पादन में होने वाले वेस्ट (waste) के प्रयोग से उप उत्पाद विकसित होने आदि के कारण लागत में कमी दृष्टिगोचर होती है, इसे मितव्ययितायें या किफायते कहते हैं। मितव्ययिता की धारणा के प्रतिपादन का श्रेय मार्शल को है।
A. आंतरिक मितव्ययतायें तब उत्पन्न होती हैं, जब फर्म श्रम विभाजन लागू करती है। चैम्बरलिन का मत है कि जब उत्पादन के सभी साधनों की मात्रा बढ़ायी जाती है तो उत्पादन का पैमाना बढ़ जाता है साधनों के अधिक मात्रा में प्रयोग से विशिष्टीकरण की सम्भावना तथा अत्यधिक कुशल साधनों विशेष रूप से उत्तम मशीनों के प्रयोग की सुविधा, उत्पादन के पैमाने में वृद्धि के कारण स्थान विशेष पर कच्चे माल की उपलब्धता, अधोसंरचना का विकास, उत्पादन में होने वाले वेस्ट (waste) के प्रयोग से उप उत्पाद विकसित होने आदि के कारण लागत में कमी दृष्टिगोचर होती है, इसे मितव्ययितायें या किफायते कहते हैं। मितव्ययिता की धारणा के प्रतिपादन का श्रेय मार्शल को है।