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Q: `अनिर्भिन्नो गभीरत्वादन्तर्गूढघनव्यथ:’ यह किस कवि ने और किस सन्दर्भ में कहा है?
  • A. कालिदास ने मेघ का वर्णन करने में
  • B. भारवि ने द्रौपदी की व्यथा का वर्णन करने में
  • C. भवभूति ने राम के करुण रस का वर्णन करने में
  • D. कालिदास ने कश्यप की दशा का वर्णन करने में
Correct Answer: Option C - भवभूति कृत उत्तररामचरित नाट्य प्रधान ग्रंथ है। इसमें भवभूति ने करुण रस का प्रतिपादन किया है। राम के इसी करुणामय भाव को दिखाते हुए कहा है कि जिस प्रकार से औषधि को पकाने के लिए पुटपाक नामक पात्र होता है जो अंदर ही अंदर औषधि को पका देता है उसी प्रकार राम का करुण भाव उनके अंदर ही अंदर पक रहा है।
C. भवभूति कृत उत्तररामचरित नाट्य प्रधान ग्रंथ है। इसमें भवभूति ने करुण रस का प्रतिपादन किया है। राम के इसी करुणामय भाव को दिखाते हुए कहा है कि जिस प्रकार से औषधि को पकाने के लिए पुटपाक नामक पात्र होता है जो अंदर ही अंदर औषधि को पका देता है उसी प्रकार राम का करुण भाव उनके अंदर ही अंदर पक रहा है।

Explanations:

भवभूति कृत उत्तररामचरित नाट्य प्रधान ग्रंथ है। इसमें भवभूति ने करुण रस का प्रतिपादन किया है। राम के इसी करुणामय भाव को दिखाते हुए कहा है कि जिस प्रकार से औषधि को पकाने के लिए पुटपाक नामक पात्र होता है जो अंदर ही अंदर औषधि को पका देता है उसी प्रकार राम का करुण भाव उनके अंदर ही अंदर पक रहा है।