Correct Answer:
Option B - दिये गये उपन्यासों में से ‘कब तक पुकारूँ’ उपन्यास यशपाल का नहीं है, बल्कि यह रांगेय राघव का उपन्यास है। रांगेय राघव के अन्य उपन्यास हैं- विषाद मठ, उबाल, राह न रुकी, बारी बरणा खोल दो, देवकी का बेटा, रत्ना की बात, भारती का सपूत, यशोधरा जीत गई, घरौंदा, लोई का ताना, लखिमा की आँखें, मेरी भव बाधा हरो, पक्षी और आकाश, चीवर, राई और पर्वत, आ़िखरी आवाज, बन्दूक और बीन। शेष सभी यशपाल के उपन्यास है। यशपाल के सभी उपन्यास इस प्रकार है- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, मनुष्य के रूप, अमिता, झूठा सच (दो भागों में) बारह घण्टे, अप्सरा का श्राप, क्यों फँसे?, मेरी तेरी उसकी बात।
B. दिये गये उपन्यासों में से ‘कब तक पुकारूँ’ उपन्यास यशपाल का नहीं है, बल्कि यह रांगेय राघव का उपन्यास है। रांगेय राघव के अन्य उपन्यास हैं- विषाद मठ, उबाल, राह न रुकी, बारी बरणा खोल दो, देवकी का बेटा, रत्ना की बात, भारती का सपूत, यशोधरा जीत गई, घरौंदा, लोई का ताना, लखिमा की आँखें, मेरी भव बाधा हरो, पक्षी और आकाश, चीवर, राई और पर्वत, आ़िखरी आवाज, बन्दूक और बीन। शेष सभी यशपाल के उपन्यास है। यशपाल के सभी उपन्यास इस प्रकार है- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, मनुष्य के रूप, अमिता, झूठा सच (दो भागों में) बारह घण्टे, अप्सरा का श्राप, क्यों फँसे?, मेरी तेरी उसकी बात।