Correct Answer:
Option D - ईर्ष्या की भावना नामक दोष समालोचक में नहीं होना चाहिए। समालोचक का यह कर्तव्य होता है कि समालोचना करते समय किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण या दोषों का सही रूप से प्रकट करना। ईर्ष्या की भावना से ग्रसित होने पर वह निष्पक्ष रूप से समालोचना नहीं कर पाता।
D. ईर्ष्या की भावना नामक दोष समालोचक में नहीं होना चाहिए। समालोचक का यह कर्तव्य होता है कि समालोचना करते समय किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण या दोषों का सही रूप से प्रकट करना। ईर्ष्या की भावना से ग्रसित होने पर वह निष्पक्ष रूप से समालोचना नहीं कर पाता।