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  • A. 1 & 4/1 और 4
  • B. 4 & 2/4 और 2
  • C. 2 & 3/2 और 3
  • D. 1 & 2/1 और 2
Correct Answer: Option D - गृह त्याग के पश्चात् बुद्ध ज्ञान की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते हुए सर्वप्रथम वैशाली के समीप आलार कालाम नामक संन्यासी के आश्रम में गये। आलार कलाम सांख्य दर्शन के आचार्य थे। यहाँ उन्होंने तपस्या की किन्तु उन्हें शांति नहीं मिली। यहाँ से वे उद्रक रामपुत्त एक-दूसरे धर्माचार्य के पास पहुँचे, जो राजगृह के समीप आश्रम में निवास करते थे। यहाँ भी उनके अशान्त मन को शान्ति नहीं मिल सका। अत: खिन्न होकर उन्होंने उनका भी साथ छोड़ दिया और उरुबेला (बोधगया) नामक स्थान पर अकेले ही तपस्या करने का निश्चय किया। बोधगया में वैशाख पूर्णिमा के दिन निरंजना नदी (आधुनिक फाल्गु नदी) के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् वे ‘बुद्ध’ कहलाये।
D. गृह त्याग के पश्चात् बुद्ध ज्ञान की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते हुए सर्वप्रथम वैशाली के समीप आलार कालाम नामक संन्यासी के आश्रम में गये। आलार कलाम सांख्य दर्शन के आचार्य थे। यहाँ उन्होंने तपस्या की किन्तु उन्हें शांति नहीं मिली। यहाँ से वे उद्रक रामपुत्त एक-दूसरे धर्माचार्य के पास पहुँचे, जो राजगृह के समीप आश्रम में निवास करते थे। यहाँ भी उनके अशान्त मन को शान्ति नहीं मिल सका। अत: खिन्न होकर उन्होंने उनका भी साथ छोड़ दिया और उरुबेला (बोधगया) नामक स्थान पर अकेले ही तपस्या करने का निश्चय किया। बोधगया में वैशाख पूर्णिमा के दिन निरंजना नदी (आधुनिक फाल्गु नदी) के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् वे ‘बुद्ध’ कहलाये।

Explanations:

गृह त्याग के पश्चात् बुद्ध ज्ञान की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते हुए सर्वप्रथम वैशाली के समीप आलार कालाम नामक संन्यासी के आश्रम में गये। आलार कलाम सांख्य दर्शन के आचार्य थे। यहाँ उन्होंने तपस्या की किन्तु उन्हें शांति नहीं मिली। यहाँ से वे उद्रक रामपुत्त एक-दूसरे धर्माचार्य के पास पहुँचे, जो राजगृह के समीप आश्रम में निवास करते थे। यहाँ भी उनके अशान्त मन को शान्ति नहीं मिल सका। अत: खिन्न होकर उन्होंने उनका भी साथ छोड़ दिया और उरुबेला (बोधगया) नामक स्थान पर अकेले ही तपस्या करने का निश्चय किया। बोधगया में वैशाख पूर्णिमा के दिन निरंजना नदी (आधुनिक फाल्गु नदी) के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् वे ‘बुद्ध’ कहलाये।