संज्ञा के जिस रूप से पुरुषत्व या स्त्रीत्व का बोध होता है, उसे क्या कहते हैं?
निम्नलिखित में से एक में कर्मधारय समास है :
`18527 की धनराशि को A, B और C के बीच इस प्रकार से विभाजित किया जाता है कि A और B के हिस्सों का अनुपात 4 : 7 है और B और C के हिस्सों का अनुपात 5 : 6 है। A का हिस्सा (`में) ज्ञात करें।
Who among the following was the architect of Madhya Pradesh Vidhan Sabha Bhavan ?/ मध्य प्रदेश विधानसभा भवन के वास्तुकार निम्नलिखित में से कौन थे?
ऑस्ट्रेलियन ओपन 2024 का मेन्स सिंगल्स टाइटल किसने जीता?
If captured Ralph know's her fate will be :
यू.पी. की प्रमुखतम तिलहनी फसल है :
यदि मलय `300 प्रति kg की दर से अमरूद खरीदता है और उन्हें `25 प्रति 100 gm की दर से बेचता है, तो उसे कितना लाभ/हानि होगा? (2 दशमलव स्थान तक पूर्णांकित )
निर्देश : नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 325से 333) के सही/सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। उत्तर भारत के संत कवि कबीर और दक्षिण भारत के संत कवि तिरुवल्लुवर के समय में लगभग दो हजार वर्ष का अंतराल है किंतु इन दोनों महाकवियों के जीवन में अद्भभुत साम्य पाया जाता है। दोनों के माता-पिता ने जन्म देकर इन्हें त्याग दिया था, दोनों का लालन-पालन निस्संतान ने बड़े स्नेह और जतन से किया था। व्यवसाय से दोनों जुलाहे थे। दोनों ने सात्विक गृहस्थ जीवन की साधना की थी। तिरुवल्लुवर का प्रामाणिक जीवन-वृत्तांत प्राप्त नहीं होता। प्राय: उन्हें चेन्नई के निकट मइलापुर गाँव का जुलाहा माना जाता है किंतु कुछ लोगों के अनुसार वे राजा एल्लाल के शासन में एक बड़े पदाधिकारी थे और उन्हें वैसा ही सम्मान प्राप्त था जैसा चंद्रगुप्त के शासनकाल में चाणक्य को। उनके बारे में अनेक दंतकथाएँ प्रचलित हैं। जैसे कहा जाता है कि एक संन्यासी नारी जाति से घृणा करता था। उसका विश्वास था कि स्त्रियाँ बुराई की जड़ हैं और उनके साथ ईश्वर-भक्ति हो ही नहीं सकती। तिरुवल्लुवर ने बड़े आदर से उसे अपने घर बुलाया। दो दिन उनके परिवार में रहकर सन्यासी के विचार ही बदल गए। उसने कहा, ‘यदि तिरूवल्लुवर और उनकी पत्नी जैसी जोड़ी हो तो गृहस्थ जीवन ही श्रेष्ठ है।’’ कबीर के दोहों की भाँति तिरुवल्लुवर ने भी छोटे छंद में कविता रची जिसे ‘कुरल’ कहा जाता है। कुरलों का संग्रह उनका एकमात्र ग्रंथ है ‘तिरुवल्लुवर’। तिरुवल्लुरल को तमिल भाषा का वेद माना जाता है। इसका प्रत्येक कुरल एक सूक्ति है और सूक्तियाँ सभी धर्मों का सार है। संपूर्ण मानवजाति को शुभ के लिए प्रेरित करना ही इसका उद्देश्य प्रतीत होता है। जैसे धर्म के बारे में दो कुरलो का आशय है : ⦁ भद्र पुरूषों! पवित्र मानव होना ही धर्म है। स्वच्छ मन वाले बनो और देखो तुम उन्नति के शिखर पर कहाँ-से-कहाँ पहुँच जाते हो। ⦁ झूठ न बोलने के गुण को ग्रहण करो तो किसी अन्य धर्म की आवश्यकता ही न रहेगी। जो संबंध चंद्रगुप्त का चाणक्य से था वहीं संबंध :
What is the standard atmospheric pressure at sea level?
Explanations:
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