Correct Answer:
Option C - ज्योतिबा फूले ने 1873ई. में ‘गुलामगिरी’ मराठी भाषा में लिखी थी। ज्योतिबा फूले एक भारतीय समाज सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। सन् 1873 ई. में इन्होंने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन भी किया था। गुलामगिरी के माध्यम से फूले ने ब्राह्मणों के सामाजिक वर्चस्व को चुनौती दी।
C. ज्योतिबा फूले ने 1873ई. में ‘गुलामगिरी’ मराठी भाषा में लिखी थी। ज्योतिबा फूले एक भारतीय समाज सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। सन् 1873 ई. में इन्होंने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन भी किया था। गुलामगिरी के माध्यम से फूले ने ब्राह्मणों के सामाजिक वर्चस्व को चुनौती दी।