Correct Answer:
Option D - उच्चतम न्यायालय ने बेरूवारी मामले (1960) में प्रास्तावना को संविधान का भाग नहीं माना था, परन्तु केशवानंद भारती वाद (1973) में प्रास्तावना को संविधान का अंग मान लिया गया तथा यह भी माना कि उद्देशिका संविधान के अन्य अनुच्छेदों के व्याख्या में मार्गदर्शक है। इसी वाद में सर्वप्रथम ‘आधारभूत ढाँचा’ सिद्धांत का प्रतिपादन किया था।
D. उच्चतम न्यायालय ने बेरूवारी मामले (1960) में प्रास्तावना को संविधान का भाग नहीं माना था, परन्तु केशवानंद भारती वाद (1973) में प्रास्तावना को संविधान का अंग मान लिया गया तथा यह भी माना कि उद्देशिका संविधान के अन्य अनुच्छेदों के व्याख्या में मार्गदर्शक है। इसी वाद में सर्वप्रथम ‘आधारभूत ढाँचा’ सिद्धांत का प्रतिपादन किया था।