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Q: In which its session, All India Muslim League had openly opposed the Civil Disobedience Movement? अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने अपने किस अधिवेशन में नागरिक अवज्ञा आन्दोलन का खुलकर विरोध किया?
  • A. Lahore Session/लाहौर अधिवेशन
  • B. Amritsar Session/अमृतसर अधिवेशन
  • C. Allahabad Session/इलाहाबाद अधिवेशन
  • D. Lucknow Session/लखनऊ अधिवेशन
Correct Answer: Option C - बंगाल के विभाजन ने साम्प्रदायिक फूट को जन्म दिया। बंगाल विभाजन के घोषणा के तत्काल बाद 1 अक्टूबर 1906 ई. को आगा खाँ तृतीय के नेतृत्व में मुसलमानों का एक शिष्टमण्डल जिसके अधिकांश सदस्य अभिजात्य वर्ग के थे, शिमला में लार्ड मिण्टो से मिले और 1906 ई. को ढाका में एक बैठक, आयोजित की गई, जिसमें ‘‘अखिल भारतीय मुस्लिम लीग’’ नामक राजनीतिक संगठन की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने अपने इलाहाबाद अधिवेशन (1930 अध्यक्ष- मो. इकबाल) में नागरिक अवज्ञा आन्दोलन का खुलकर विरोध किया।
C. बंगाल के विभाजन ने साम्प्रदायिक फूट को जन्म दिया। बंगाल विभाजन के घोषणा के तत्काल बाद 1 अक्टूबर 1906 ई. को आगा खाँ तृतीय के नेतृत्व में मुसलमानों का एक शिष्टमण्डल जिसके अधिकांश सदस्य अभिजात्य वर्ग के थे, शिमला में लार्ड मिण्टो से मिले और 1906 ई. को ढाका में एक बैठक, आयोजित की गई, जिसमें ‘‘अखिल भारतीय मुस्लिम लीग’’ नामक राजनीतिक संगठन की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने अपने इलाहाबाद अधिवेशन (1930 अध्यक्ष- मो. इकबाल) में नागरिक अवज्ञा आन्दोलन का खुलकर विरोध किया।

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बंगाल के विभाजन ने साम्प्रदायिक फूट को जन्म दिया। बंगाल विभाजन के घोषणा के तत्काल बाद 1 अक्टूबर 1906 ई. को आगा खाँ तृतीय के नेतृत्व में मुसलमानों का एक शिष्टमण्डल जिसके अधिकांश सदस्य अभिजात्य वर्ग के थे, शिमला में लार्ड मिण्टो से मिले और 1906 ई. को ढाका में एक बैठक, आयोजित की गई, जिसमें ‘‘अखिल भारतीय मुस्लिम लीग’’ नामक राजनीतिक संगठन की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने अपने इलाहाबाद अधिवेशन (1930 अध्यक्ष- मो. इकबाल) में नागरिक अवज्ञा आन्दोलन का खुलकर विरोध किया।