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Q: In which inscription, Kalinga Vijaya is mentioned? किस अभिलेख में कलिंग विजय का वर्णन है?
  • A. Maski Inscription/मास्की अभिलेख
  • B. Rudradaman Inscription/रुद्रदामन अभिलेख
  • C. Junagarh Inscription/जूनागढ़ अभिलेख
  • D. Hathigumpha Inscription/हाथीगुम्फा अभिलेख
  • E. None of the above/More than one of the above उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
Correct Answer: Option E - कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) का विस्तृत वर्णन अशोक अपने 13वें शिलालेख में करता है। नंदवंश के पतन के पश्चात कलिंग एक स्वतंत्र राज्य बन गया था। यह राज्य हाथियों तथा हाथीदांत के लिए विख्यात था। भारत में प्राचीनतम ज्ञात अभिलेख मौर्य राजा अशोक के हैं। जो मुख्यत: ब्राह्मी लिपि व प्राकृत भाषा (सर्वाधिक), पाश्चिमोत्तर क्षेत्र में खरोष्ठी लिपि जबकि उत्तर के सीमांत क्षेत्रों में यूनानी तथा आरमाइक लिपियों में लिखे मिले हैं। मास्की, गुर्जरा, नित्तुर तथा उद्धेगोलम अभिलेखों में अशोक का वास्तविक नाम लिखा मिला है। जबकि अशोक के अन्य अभिलेखों में उसका नाम/उपाधि देवानाम प्रियदस्सी लिखा मिला है।
E. कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) का विस्तृत वर्णन अशोक अपने 13वें शिलालेख में करता है। नंदवंश के पतन के पश्चात कलिंग एक स्वतंत्र राज्य बन गया था। यह राज्य हाथियों तथा हाथीदांत के लिए विख्यात था। भारत में प्राचीनतम ज्ञात अभिलेख मौर्य राजा अशोक के हैं। जो मुख्यत: ब्राह्मी लिपि व प्राकृत भाषा (सर्वाधिक), पाश्चिमोत्तर क्षेत्र में खरोष्ठी लिपि जबकि उत्तर के सीमांत क्षेत्रों में यूनानी तथा आरमाइक लिपियों में लिखे मिले हैं। मास्की, गुर्जरा, नित्तुर तथा उद्धेगोलम अभिलेखों में अशोक का वास्तविक नाम लिखा मिला है। जबकि अशोक के अन्य अभिलेखों में उसका नाम/उपाधि देवानाम प्रियदस्सी लिखा मिला है।

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कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) का विस्तृत वर्णन अशोक अपने 13वें शिलालेख में करता है। नंदवंश के पतन के पश्चात कलिंग एक स्वतंत्र राज्य बन गया था। यह राज्य हाथियों तथा हाथीदांत के लिए विख्यात था। भारत में प्राचीनतम ज्ञात अभिलेख मौर्य राजा अशोक के हैं। जो मुख्यत: ब्राह्मी लिपि व प्राकृत भाषा (सर्वाधिक), पाश्चिमोत्तर क्षेत्र में खरोष्ठी लिपि जबकि उत्तर के सीमांत क्षेत्रों में यूनानी तथा आरमाइक लिपियों में लिखे मिले हैं। मास्की, गुर्जरा, नित्तुर तथा उद्धेगोलम अभिलेखों में अशोक का वास्तविक नाम लिखा मिला है। जबकि अशोक के अन्य अभिलेखों में उसका नाम/उपाधि देवानाम प्रियदस्सी लिखा मिला है।