Correct Answer:
Option A - किराये के आधार पर मूल्यांकन (Valuation based on rental cost)- इस विधि में, भवन-किराये के रूप प्राप्त होने वाली कुल वार्षिक आय से सभी सम्भावित खर्चे (मरम्मत, शोधन विधि, स्थानीय कर, प्रबंधन व्यय इत्यादि) घटाकर शुद्ध आय ज्ञात कर ली जाती है। अब ब्याज दर पर वर्षाधार ज्ञात करके इसे शुद्ध आय से गुणा किया जाता है, जो भवन का मूल्यांकन होता है।
A. किराये के आधार पर मूल्यांकन (Valuation based on rental cost)- इस विधि में, भवन-किराये के रूप प्राप्त होने वाली कुल वार्षिक आय से सभी सम्भावित खर्चे (मरम्मत, शोधन विधि, स्थानीय कर, प्रबंधन व्यय इत्यादि) घटाकर शुद्ध आय ज्ञात कर ली जाती है। अब ब्याज दर पर वर्षाधार ज्ञात करके इसे शुद्ध आय से गुणा किया जाता है, जो भवन का मूल्यांकन होता है।